नई दिल्ली। इंडिगो एयरलाइन द्वारा पिछले दो दिनों में लगभग 500 उड़ानें रद्द किए जाने से उत्पन्न स्थिति ने सैकड़ों यात्रियों को भारी मुश्किल में डाल दिया है। यह मुद्दा शुक्रवार को संसद के उच्च सदन, राज्यसभा में भी प्रमुखता से उठाया गया, जहां सांसदों ने एयरलाइन के एकाधिकार पर चिंता व्यक्त की और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
सांसदों ने उठाई आवाज, साप्ताहिक योजनाएं प्रभावित-
शून्यकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि इंडिगो के इस कदम से न केवल आम लोग, बल्कि संसद सदस्य भी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में सांसदों ने सप्ताहांत में अपने घर जाने और सोमवार को वापस दिल्ली लौटने के लिए टिकट बुक किए थे, लेकिन उड़ानें रद्द होने से उनकी यात्रा की योजनाएं धरी की धरी रह गईं और परेशानी बढ़ गई है।
तिवारी ने आरोप लगाया कि यह समस्या मुख्य रूप से इंडिगो के बढ़ते एकाधिकार की वजह से पैदा हुई है। उन्होंने सदन के माध्यम से सरकार से पूछा कि इस स्थिति के लिए जिम्मेदार नियमों पर सरकार क्या कदम उठा रही है और इस समस्या का समाधान कब तक किया जाएगा। उन्होंने संबंधित मंत्री से इस मामले में सदन को विस्तृत जानकारी देने की मांग की।
सरकार ने दिया जांच का आश्वासन-
सांसदों की चिंताओं का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि सदन में आने से ठीक पहले उन्होंने केंद्रीय विमानन मंत्री से बात की है और एयरलाइन के सामने आ रही तकनीकी समस्याओं की समीक्षा की जा रही है।
रिजिजू ने कहा कि उन्होंने विमानन मंत्री से आग्रह किया है कि वह इस मुद्दे पर एक विस्तृत और तथ्यात्मक जवाब तैयार करें, क्योंकि कई सदस्य इस विषय पर चर्चा में भाग लेंगे। उन्होंने जोर दिया कि इस गंभीर स्थिति की स्पष्ट जानकारी सदन के सदस्यों के साथ-साथ देश के आम नागरिकों तक भी पहुंचनी चाहिए।











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