मेरठ। हस्तिनापुर के मखदूमपुर घाट पर गंगा दशहरा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सूर्य की पहली किरण के साथ ही हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में डुबकी लगाई और पवित्र जल से अपने तन-मन को पवित्र किया। परिवार के साथ आए श्रद्धालुओं ने पिंडदान और पूजा-अर्चना भी की।
गंगा घाट तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब चार किलोमीटर का उबड़-खाबड़, धूलभरा रास्ता पार करना पड़ा। मोटरसाइकिल और छोटे वाहन रास्ते में धंस गए। महिलाएं, बुज़ुर्ग और बच्चे तेज धूप में पैदल चलते दिखे, फिर भी किसी ने शिकायत नहीं की क्योंकि मंज़िल मां गंगा थीं।
बुधवार को जिलाधिकारी द्वारा मेले का उद्घाटन तो कर दिया गया, परंतु मेला स्थल तक पहुंचने के रास्ते को दुरुस्त नहीं कराया गया। श्रद्धालुओं को गड्ढों, धूल और रेत से भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। कई लोगों को बच्चों को गोद में उठाकर घाट तक लाना पड़ा।
इस वर्ष गंगा दशहरे पर दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बने। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग और व्यतिपात योग का एक साथ आना कई दशकों बाद हुआ है। इस कारण गंगा स्नान, दान, जप, तप और व्रत का विशेष फल मिलने की मान्यता रही।
घाट पर कई परिवारों ने बच्चों के मुंडन संस्कार कराए तो वहीं अनेक लोगों ने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। गंगा किनारे बैठे पंडितों को श्रद्धालुओं ने आस्था से दान-दक्षिणा दी। यह दृश्य भारतीय परंपरा और संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था। पुलिसकर्मी लगातार अनाउंसमेंट कर रहे थे कि श्रद्धालु गहरे पानी में न जाएं। घाट पर गोताखोर भी मौजूद रहे ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।
श्रद्धालुओं ने अपने श्रम, धैर्य और आस्था से यह साबित किया कि मां गंगा के बुलावे पर कोई कठिनाई आड़े नहीं आती। लेकिन इस भीड़ और परेशानी से प्रशासन को सबक लेना चाहिए। यदि समय रहते रास्ते बनाए जाते, तो लाखों लोगों की यात्रा और भी सुखद बन सकती थी।











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