मुजफ्फरनगर। सिविल लाइंस क्षेत्र के ब्रह्मपुरी मोहल्ले में उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई जब बिजली विभाग के अधिकारी ट्रांसफार्मर लगाने पहुंचे। अरोड़ा क्वार्टर के सामने प्रस्तावित इस ट्रांसफार्मर को लगाने का मोहल्ले के लोगों और क्षेत्रीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। मामला इतना बढ़ गया कि स्थानीय भाजपा नेता कमल कांत और वार्ड पार्षद देवेश कौशिक के नेतृत्व में लोगों ने धरना शुरू कर दिया।
मोहल्ले वालों का कहना था कि ट्रांसफार्मर को पिलर पर लगाया जाए ताकि रास्ता बाधित न हो। उनका यह भी तर्क था कि यदि फाउंडेशन बनाकर ट्रांसफार्मर रखा गया, तो उससे मोहल्ले के मुख्य मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होगी और बरसात के मौसम में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। बावजूद इसके, विद्युत अधिकारी फाउंडेशन निर्माण पर अड़े रहे।
इस विवाद ने राजनीतिक रंग तब ले लिया जब भाजपा कार्यकर्ता, जिनकी सरकार केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सत्तारूढ़ है, को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। लोगों का आरोप था कि डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के बाद अब विद्युत विभाग भी जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की बातों की अनदेखी कर रहा है।
लगभग एक घंटे तक चली बहस और धरने के बाद, जब वार्ड सभासद ने उच्चाधिकारियों से शिकायत करने की चेतावनी दी, तब जाकर विद्युत अधिकारी पीछे हटे। ट्रांसफार्मर को फिलहाल स्थापित नहीं किया गया और अधिकारी बिना कोई कार्य किए लौट गए।
इस घटना ने न सिर्फ प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सत्तारूढ़ पार्टी के स्थानीय प्रतिनिधियों की प्रभावशीलता पर भी सवालिया निशान लगाया है। जनता चाहती है कि विकास कार्य उनकी सहूलियत और सुरक्षा को ध्यान में रखकर हों, न कि विभागीय सुविधा और जिद के आधार पर।










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