मुजफ्फरनगर। राज्य कर विभाग ने जिले में करोड़ों रुपये की वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) चोरी में शामिल एक बड़े, अंतर्राज्यीय संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। लंबी जाँच और छापेमारी के बाद, विभाग ने चार फर्जी कंपनियों और सात वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कानूनी मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई से जिले के कारोबारी समुदाय में हड़कंप मच गया है।
4 राज्यों में फैला था फर्जीवाड़ा-
जाँच से पता चला कि यह गिरोह सिर्फ़ मुज़फ़्फ़रनगर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क चार राज्यों: बिहार, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था। गिरोह का मुख्य काम फर्जी पतों पर ऐसी कंपनियाँ बनाना था जिनका कोई वास्तविक व्यावसायिक अस्तित्व नहीं था।
इन कागजी कंपनियों के माध्यम से, यह गिरोह स्क्रैप (कबाड़) के नाम पर बड़े पैमाने पर केवल कागजी बिलिंग करता था, जिससे करोड़ों रुपये का राजस्व सरकार को नहीं मिल रहा था।
जांच और खुलासा-
इस बड़े फर्जीवाड़े की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब अगस्त माह में सीजीएसटी अंबाला डिवीजन ने छापेमारी की और कई अस्तित्वहीन कंपनियों की जानकारी मिली। इसी जांच को आगे बढ़ाते हुए, सितंबर माह में राज्य कर विभाग की टीम ने मुजफ्फरनगर में चेकिंग अभियान चलाया।
चेकिंग के दौरान स्क्रैप से लदे सात वाहन पकड़े गए। जब इन वाहनों के दस्तावेजों और बिलों की जांच की गई, तो वे सभी फर्जी पाए गए। जिन कंपनियों के नाम पर बिल काटे गए थे, उनके पते पर जांच करने पर वे कंपनियां अस्तित्वहीन निकलीं।
सहायक आयुक्त राज्य कर नितिन कुमार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। नितिन कुमार ने बताया कि यह गिरोह कई राज्यों में फैला एक संगठित नेटवर्क है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस अवैध कारोबार में कुछ स्थानीय व्यापारी और व्यापारिक संगठन भी शामिल हो सकते हैं।
विभाग ने कई संदिग्धों को अपनी निगरानी में लिया है और स्पष्ट किया है कि जीएसटी चोरी से जुड़ी हर कड़ी को उजागर किया जाएगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। विभाग अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने और अन्य शामिल लोगों की पहचान करने में जुटा है।










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