बरेली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान एक बुर्कापोश मुस्लिम महिला डॉक्टर का नकाब हटाने की कोशिश का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना पर आल इंडिया मुस्लिम जमात ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे नारी गरिमा और धार्मिक पहचान पर हमला करार दिया है।
धार्मिक पहचान से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं: मौलाना रजवी-
जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिजाब या नकाब कोई फैशन नहीं, बल्कि मुस्लिम महिलाओं की गहरी आस्था, उनकी पहचान और संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा, “एक मुख्यमंत्री जैसे उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक मंच पर ऐसी हरकत करना पद की गरिमा के खिलाफ है और यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।”
संविधान देता है पहनावे की आज़ादी-
मौलाना रजवी ने नीतीश कुमार को नसीहत देते हुए कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद का पहनावा पहनने और अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने की पूरी आज़ादी देता है। किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वह जबरन किसी की धार्मिक मर्यादा को ठेस पहुंचाए या उसे अपमानित करे।
माफी न मांगने पर दी बड़े आंदोलन की चेतावनी-
आल इंडिया मुस्लिम जमात ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस व्यवहार के लिए तत्काल और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। मौलाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि मुख्यमंत्री इस पर खेद प्रकट नहीं करते हैं, तो मुस्लिम समाज इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होगा।
क्या थी घटना?
उल्लेखनीय है कि 15 दिसंबर 2025 को पटना में आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटने के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच पर एक महिला डॉक्टर का नकाब पकड़कर नीचे खींच दिया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से ही देशभर में आक्रोश व्याप्त है।











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