मुरादाबाद। मुरादाबाद प्रशासन की जांच पड़ताल में अरबों रुपये की सरकारी जमीन का घोटाला सामने आया है। तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत और रिकाॅर्ड में हेराफेरी कराकर भू माफिया ने जिले की 230 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है। इसमें मनोहरपुर, लाकड़ी फाजलपुर, डिडौरी, व मंगूपुरा में सरकारी जमीन के अलावा नदी व ग्राम समाज का रकबा शामिल है।
घोटाले की जांच रिपोर्ट डीएम को साैंप दी गई है। जिसे शासन को भेजने की तैयारी है। करीब चार महीने पहले सरकारी जमीनों पर कब्जे की हुई शिकायतों को आधार बनाकर जिला प्रशासन ने पुरानी और नई खताैनियों की जांच शुरू कराई। साथ ही सरकारी जमीन का स्थलीय निरीक्षण भी कराया।
सिटी मजिस्ट्रेट किंशुक श्रीवास्तव, एसडीएम सदर डॉ. राममोहन मीना, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी व भोजपुर के नायब तहसीलदार ने मनोहरपुर, लाकड़ी फाजलपुर, डिडाैरी व मंगूपुरा में सरकारी जमीन, नदी और ग्राम समाज की भूमि की जांच पड़ताल की। इसके बाद तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत और रिकाॅर्ड में हेराफेरी कर सरकारी जमीन कब्जाने की परतें खुलने लगी।
इन चार गांवों, नदी और ग्राम समाज की करीब 230 एकड़ सरकारी जमीन पर भू माफिया का कब्जा पाया गया। भू माफिया ने तहसील कर्मचारियों से साठगांठ कर खतौनी में फर्जी इंद्राज करा लिए। बाद में उसे चकबंदी में भी दर्ज करा दिया गया। इन जमीन में से कुछ पर बिल्डरों ने अपनी सोसायटी का नक्शा भी पास करा लिया है।
मंगूपुरा गांव से 51 एकड़ का रकबा ही कागजों में गायब करा दिया गया। जांच में इस रकबे का मानचित्र जिला प्रशासन को नहीं मिला है। इसी में पांच एकड़ नदी की जमीन पर कब्जा मिला है। जांच में पाया गया है कि मंगूपुरा व डिडौरी में 18.37 हेक्टेयर का रकबा दोनों गावों में दर्ज है।
यानी किसी एक गांव में इतनी जमीन का घोटाला हुआ है। इसमें ग्राम समाज की जमीन भी शामिल है। लाकड़ी फाजलपुर व मनोहरपुर में 59.31 एकड़ का सरकारी रकबा किसानों के नाम दर्शाया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट किंशुक श्रीवास्तव ने जांच आख्या डीएम को सौंप दी है। अब इसे शासन को भेजने की तैयारी है।
जांच टीम ने पाया है कि जमीन के रिकॉर्ड में लंबे समय से लगातार धांधली हो रही है। पहले रसूखदारों ने खतौनी में फर्जीवाड़ा कराया फिर उसे सही साबित करने के लिए चकबंदी में भी शामिल करा दिया गया। फिलहाल प्रशासन ने इन सभी जमीनों की खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी है। डीएम ने उन अधिकारियों व कर्मचारियों को चिह्नित करने के भी निर्देश दिए हैं, जिनके समय में यह घोटाला हुआ था। शासन को इसकी रिपोर्ट भेजी जा रही है। जांच में साफ हो गया है कि भूमाफिया ने धोखाधड़ी से सरकारी भूमि पर दाखिल खारिज कराया है।
सबसे पहले मनोहरपुर गांव की 120 एकड़ जमीन पर फर्जीवाड़ा सामने आया था। यहां भी सरकारी जमीन व नदी के रकबे पर कब्जा पाया गया था। डीएम ने एमडीए को निर्देशित कर दिल्ली रोड की बेशकीमती जमीनों के नक्शे होल्ड करा दिए हैं। कई एकड़ जमीन पर बिल्डरों के प्रोजेक्ट खड़े हो गए हैं। अब इन सभी की खरीद फरोख्त पर रोक लग गई है। बिल्डर मामले को सुलटाने की कोशिश में राजनीतिक दखल के लिए सिफारिश लगा रहे हैं। हालांकि अब तक किसी को लाभ नहीं हुआ है।
तीन से चार माह पहले तक जिला प्रशासन के पास लगातार जमीन पर कब्जे से संबंधित छोटी-छोटी शिकायतें आ रही थीं। डीएम ने इसे गंभीरता से लेकर पुराने रिकॉर्ड खंगाले और नई अभिलेखों से मिलान किया तो बड़ा फर्जीवाड़ा पाया गया। इसके बाद गांवों में जांच पड़ताल शुरू हुई। तब पता चला कि एक नहीं कई गांवों में रसूखदारों ने लाभ लेेने के लिए सरकारी जमीन को धोखाधड़ी से अपने नाम करा लिया। अब प्रशासन अपने स्तर से जांच पड़ताल कर रहा है, जिसमें घोटाले सामने आ रहे हैं।
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा पाया गया है। अभी रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद शासन को भेज दी जाएगी। सरकारी जमीन सरकार के नाम ही दर्ज कराई जाएगी। – अनुज सिंह, डीएम मुरादाबाद











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