नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के बीमा क्षेत्र (Insurance Sector) में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में ‘सबका बीमा सबकी सुरक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किया। इस विधेयक के माध्यम से बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रावधान किया गया है।
विधेयक की मुख्य बातें और संशोधन-
यह विधेयक मुख्य रूप से तीन पुराने कानूनों— इंश्योरेंस एक्ट 1938, लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (LIC) एक्ट 1956 और IRDA एक्ट 1999 में संशोधन का प्रस्ताव करता है।
बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश की अनुमति देने के साथ-साथ, बीमा एजेंटों और LIC एजेंटों के कमीशन को तय करने का अधिकार अब नियामक (Regulator) के पास होगा।
विपक्ष की आपत्तियां और हंगामा-
विधेयक पेश होते ही विपक्षी सदस्यों ने इसके नाम और प्रावधानों पर सवाल उठाए:
नाम और भाषा पर विवाद: आरएसपी नेता एन.के. प्रेमचंद्रन सहित कई सदस्यों ने संविधान के अनुच्छेद 348 का हवाला देते हुए विधेयक का नाम हिन्दी में रखे जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विधेयक का नाम इसके उद्देश्यों से मेल नहीं खाता।
राष्ट्रीय हित और एजेंटों की चिंता: विपक्ष ने दलील दी कि 100% FDI राष्ट्रीय हित को प्रभावित कर सकता है। साथ ही, एजेंटों के कमीशन का अधिकार नियामक को देने से बीमा क्षेत्र की ‘बैकबोन’ कहे जाने वाले एजेंटों के हितों को नुकसान पहुँचने की आशंका जताई गई।
वित्त मंत्री का जवाब-
विपक्ष के विरोध पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि विधेयक लाने में कोई संवैधानिक या विधायी कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘जीवन ज्योति बीमा’ और ‘अटल बीमा योजना’ जैसी योजनाओं से आम आदमी को सुरक्षा मिली है और यह विधेयक उसी समावेशन को विस्तार देगा। नाम के विवाद पर लोकसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि विधेयक का नाम चुनना मंत्रालय का अधिकार क्षेत्र है।
निष्कर्ष: इस विधेयक के पारित होने के बाद भारत के बीमा बाजार में विदेशी कंपनियों की हिस्सेदारी पूरी तरह बढ़ सकेगी, जिससे प्रतिस्पर्धा और तकनीक में सुधार की उम्मीद है, हालांकि एजेंटों के हितों पर बहस जारी रहने की संभावना है।











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