शामली। कैराना क्षेत्र के 32 गांवों की लगभग 60 हजार बीघा वन भूमि को लेकर चल रहा विवाद अब मुख्यमंत्री के दरबार में पहुँच गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संवेदनशील मामले में किसानों को बड़ी राहत देते हुए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि स्थिति स्पष्ट होने तक किसानों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
MLC वीरेंद्र सिंह और मनीष चौहान ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात-
एमएलसी चौधरी वीरेंद्र सिंह और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उन्हें इस भूमि प्रकरण की तथ्यात्मक जानकारी दी। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि इन 32 गांवों के किसान पिछले 50 से अधिक वर्षों से इस भूमि पर खेती कर रहे हैं। बिना किसी ठोस कानूनी आधार के जमीन वापस लेना हजारों किसान परिवारों के साथ अन्याय होगा।
प्रमुख सचिव वन विभाग को जांच के आदेश-
मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रमुख सचिव (वन विभाग) को निर्देश दिए कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विधि-सम्मत जांच की जाए। सीएम ने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है और जांच के बाद ही कोई अगला कदम उठाया जाएगा।
किसानों के साथ मजबूती से खड़े नेता-
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान ने बताया कि वे इस मामले में प्रमुख सचिव से भी मिल चुके हैं। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि किसी भी कीमत पर उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। इस लड़ाई को शासन स्तर तक मजबूती से लड़ा जा रहा है।
मुलाकात के दौरान क्षेत्र के कई प्रमुख ग्राम प्रधान भी मौजूद रहे, जिनमें सुनील प्रधान (डोकपुरा), विक्रम प्रधान (पठेढ़), परीक्षित (भोगी माजरा) और गुरलाल प्रधान (चौतरा) शामिल थे।











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