लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति और चुनावी गणित को पूरी तरह बदल देने वाली एक बड़ी खबर लखनऊ से सामने आई है। प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य पूरा हो गया है और इसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले हैं।
यूपी वोटर लिस्ट में बड़ी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 2.89 करोड़ नाम कटे-
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, गहन जांच और डिजिटल वेरिफिकेशन के बाद उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। पुनरीक्षण से पहले प्रदेश में मतदाताओं की कुल संख्या 15.44 करोड़ थी, जो अब घटकर लगभग 12.50 करोड़ के आसपास रहने का अनुमान है।
नाम कटने के 5 बड़े कारण-
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कटौती मनमानी नहीं बल्कि जमीनी हकीकत पर आधारित है:
पलायन (Shifted): 1.26 करोड़ लोग स्थाई रूप से यूपी छोड़कर दूसरे राज्यों में बस गए हैं।
मृत्यु (Deceased): 45.95 लाख मृतक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।
लापता (Missing): 84.20 लाख मतदाता वेरिफिकेशन के दौरान अपने पते पर नहीं मिले।
फर्जी/दोहरे नाम (Duplicates): 23.32 लाख वोटर्स ऐसे थे जिनके नाम एक से ज्यादा जगह दर्ज थे।
लापरवाही: 9.37 लाख लोगों ने गणना पत्र जमा नहीं किया।
देशभर में यूपी सबसे आगे-
इस प्रक्रिया के तहत देश के 11 राज्यों में कुल 3.69 करोड़ नाम हटाए गए, जिनमें अकेले यूपी से 2.89 करोड़ नाम शामिल हैं। तमिलनाडु और गुजरात में भी बड़ी कटौती हुई है, लेकिन यूपी का आंकड़ा सबसे विशाल है।
राजनीतिक दलों में खलबली-
इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम कटने से राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज हो गई हैं। भाजपा सहित कई दलों ने इस प्रक्रिया की समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन आयोग ने इसे और बढ़ाने से इनकार कर दिया है।
अगला कदम: मतदाता सूची की अंतिम ड्राफ्ट लिस्ट 31 दिसंबर 2025 को जारी की जाएगी, जिससे स्पष्ट होगा कि आगामी चुनावों में किस क्षेत्र का कितना सियासी समीकरण बदला है।










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