मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ (Bench) की स्थापना की दशकों पुरानी मांग आज एक जन-आंदोलन में तब्दील होती दिखी। बुधवार को वकीलों के आह्वान पर पूरा मेरठ ‘मुकम्मल बंद’ रहा। इस आंदोलन की सबसे बड़ी मजबूती तब दिखी जब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी इसे अपना पूर्ण समर्थन दिया, जिसके चलते शहर के निजी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं।
आंदोलन के मुख्य बिंदु-
सड़कों पर उतरे अधिवक्ता: सुबह से ही जिला बार एसोसिएशन और मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्षों क्रमशः राजीव त्यागी और संजय शर्मा के नेतृत्व में वकील कचहरी के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। वकीलों की टोलियों ने शहर भर में जुलूस निकालकर व्यापारियों से समर्थन मांगा, जिसके बाद प्रमुख बाजार पूरी तरह बंद रहे।
चिकित्सकों का ‘हीलिंग टच’: आईएमए की अध्यक्षा डॉ. मनीषा त्यागी ने बताया कि सुबह 9 से शाम 5 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रखी गईं। हालांकि, मानवता के नाते आपातकालीन (Emergency) सेवाएं बहाल रखी गईं ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो।
छावनी में तब्दील हुआ शहर: किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने मोर्चा संभाले रखा। शहर के संवेदनशील इलाकों और प्रमुख चौराहों पर पुलिस, पीएसी (PAC) और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई थी।
यातायात और सुरक्षा: प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए रूट डायवर्जन लागू किया था। थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए थे कि शांति व्यवस्था बनी रहे और आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।
निष्कर्ष: मेरठ का यह बंद सरकार के लिए एक बड़ा संदेश है कि अब हाई कोर्ट बेंच की मांग केवल वकीलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर प्रभावशाली वर्ग का समर्थन जुड़ चुका है।











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