नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट पर दिल्ली की अदालत द्वारा संज्ञान लेने से इनकार करने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे ‘न्याय और सत्य की ऐतिहासिक जीत’ करार दिया है। बुधवार को अपने आवास पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खरगे ने भाजपा सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें-
राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप: खरगे ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामला पूरी तरह से “फर्जी” और “राजनीतिक द्वेष” से प्रेरित था, जिसका एकमात्र उद्देश्य गांधी परिवार और कांग्रेस नेतृत्व को बदनाम और प्रताड़ित करना था।
स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत: उन्होंने याद दिलाया कि नेशनल हेराल्ड की स्थापना 1938 में स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा की गई थी। भाजपा सरकार ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग जैसे झूठे आरोपों से जोड़कर संस्था की छवि खराब करने की कोशिश की।
कानूनी खामियों का खुलासा: वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि 2014 से 2021 तक खुद सीबीआई और ईडी ने अपनी फाइलों में माना था कि इस मामले में कोई ‘प्रेडिकेट ऑफेंस’ (FIR) नहीं बनता। इसके बावजूद, जून 2021 में राजनीतिक दबाव के तहत ईसीआईआर दर्ज की गई।
90 घंटे की पूछताछ और ‘जीरो’ रिजल्ट-
सिंघवी ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 2021 से 2025 के बीच सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे वरिष्ठ नेताओं से करीब 90 घंटे पूछताछ की गई। संपत्तियां अटैच की गईं और खाते फ्रीज किए गए, लेकिन अंत में अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि धनशोधन का मामला बनता ही नहीं है।
निष्कर्ष: कांग्रेस ने इस अदालती फैसले को भाजपा सरकार के खिलाफ अपनी नैतिक और कानूनी जीत बताया है, जिससे आने वाले दिनों में संसद से सड़क तक सियासी माहौल और गर्माने की उम्मीद है।











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