लखनऊ। मेरठ के सिवालखास से राष्ट्रीय लोकदल के सिंबल पर चुनाव जीते विधायक गुलाम मौहम्मद ने विधानसभा में अपने संबोधन में भाजपा सरकार पर जमकर हमला किया, मगर उनके संबोधन की शुरुआत समाजवादी पार्टी ओर राष्ट्रीय लोकदल के खेमे में भी बेचैनी पैदा कर गई। गुलाम मौहम्मद ने जयंत चौधरी के स्थान पर विधानसभा में अखिलेश यशदव को राष्ट्रीय अध्यक्ष कहकर संबोधित किया तो राजनीतिक हल्के में इसके अलग-अलग मायने निकाले जाने लगे।
2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन हुआ था। इस गठबंधन में समाजवादी पार्टी के कई नेता राष्ट्रीय लोकदल के सिंबल पर चुनाव लड़कर विधायक बने। कल उत्तर प्रदेश विधानसभा में राष्ट्रीय लोकदल के सिवालखास विधायक गुलाम मौहम्मद ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री और हमारे आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी। इसे लेकर राजनीतिक हल्कों में चर्चा शुरु हो गई। नीचे क्लिक कर देखें वीडियो
रालोद के सिंबल पर चुनाव जीते विधायक गुलाम मौहम्मद ने विधानसभा में अखिलेश को बताया राष्ट्रीय अध्यक्ष, हक्के-बक्के रह गए लोग, देखें वीडियो @yadavakhilesh @jayantrld @RLDparty #upvidhansabha #rld #meerut pic.twitter.com/tbio2s76OH
— ASB NEWS INDIA (@asbnewsindia) February 24, 2023
2022 के जब विधानसभा चुनाव होने थे तब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद के मुखिया चौधरी जयंत सिंह के बीच चुनावी गठबंधन हुआ था। जब टिकट बंटवारे की बात चल रही थी तब कुछ सीटों पर राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी के बीच पेंच फंसा हुआ था। ऐसे में दोनों नेताओं ने आपसी सहमति से राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर समाजवादी पार्टी के नेताओं को चुनाव लड़ाया।
गुलाम मौहम्मद मेरठ की सिवालखास विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के नेता होते हुए राष्ट्रीय लोकदल के सिंबल पर चुनाव लड़े और जीत गए। आज जब उत्तर प्रदेश की विधानसभा में महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा हो रही थी तब विधानसभा अध्यक्ष की सीट पर बैठे अधिष्ठाता ने राष्ट्रीय लोकदल का नाम लेते हुए विधायक सिवाल खास गुलाम मोहम्मद को बोलने के लिए आमंत्रित किया तो विधायक गुलाम मोहम्मद ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि मैं खुद को पूर्व मुख्यमंत्री और हमारे आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी से खुद को सम्बद्ध करते मैं अपनी शुरुआत एक शेर के साथ करना चाहता हूं।
गुलाम मौहम्मद ने किस ध्येय से यह संबोधन किया यह तो वही जानें, लेकिन राजनीतिक हल्कों में इसे लेकर चर्चाएं जरूर शुरु हो गई हैं।











Discussion about this post