मुजफ्फरनगर। जिला मुख्यालय पहुंचे एक पीड़ित ने बैंक अधिकारियों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित रिज़वान ने बताया कि वर्ष 2013 में उसने केनरा बैंक से 4,90,000 का होम लोन लिया था, जिसमें से लगभग 2 लाख रुपये वह चुका चुका है। इसके बावजूद, बैंक ने मनमानी करते हुए उसके मकान को जबरन खाली करा लिया और कब्जे में ले लिया।
रिजवान का आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने उसके ₹80 लाख की अनुमानित कीमत वाले मकान को मात्र ₹22 लाख में नीलाम कर दिया। उन्होंने दावा किया कि वह कई बार बैंक अधिकारियों से निवेदन कर चुका था कि उसे मकान बेचने की अनुमति दी जाए, ताकि वह खुद ही कर्ज चुका सके। लेकिन बैंक ने कोई मौका नहीं दिया।
रिजवान ने बताया कि सुबह उसने जिलाधिकारी कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराई और दोपहर में ही बैंक अधिकारी पुलिस और मजदूरों के साथ खालापार स्थित उसके मकान पर पहुंच गए। उसके घर का सारा सामान बाहर सड़क पर फेंक दिया गया। अब वह अपने परिवार सहित बेघर होकर दर-दर भटकने को मजबूर है।
बैंक अधिकारियों का कहना है कि रिजवान ने 2013 में लोन लिया था लेकिन उसके बाद से कोई किस्त नहीं भरी। ब्याज सहित कुल बकाया राशि 32 लाख तक पहुंच गई, जिसके चलते नियमानुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मकान की नीलामी की गई। बैंक के अनुसार, अब यह मकान किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज हो चुका है और आज की कार्रवाई उसी व्यक्ति के कब्जा दिलाने हेतु की गई है। मकान में रखा सामान सुरक्षित रूप से पीड़ित को सौंप दिया जाएगा।











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