मुजफ्फरनगर। चरथावल क्षेत्र के दूधली गांव में पिछले 20 वर्षों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया अब एक बड़े विवाद में बदल गई है। किसान मजदूर संगठन के बैनर तले गांव के नाराज किसान कलक्ट्रेट पर धरना दे रहे हैं और चकबंदी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियाँ दर्ज करा रहे हैं।
किसानों की प्रमुख शिकायतें-
नक्शा-23 में खामियाँ: किसानों का कहना है कि गांव के नक्शा-23 में रकबे में कमी और कीमत का सही आंकलन नहीं किया गया, जिससे वे असंतुष्ट हैं।
अपूर्ण प्रक्रिया: ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर चकबंदी प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने की मांग की है।
न्याय की मांग: किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी आपत्तियों को अधिकारियों द्वारा सही ढंग से नहीं निपटाया जा रहा है, जिससे उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया-
सीओ चकबंदी की मौजूदगी: किसानों का धरना प्रदर्शन देखकर सीओ चकबंदी मौके पर पहुँचे और ग्रामीणों से बातचीत की, ताकि मामले को शांत किया जा सके।
दूसरे पक्ष का आरोप-
राजनीतिक साजिश का आरोप: चकबंदी प्रक्रिया से संतुष्ट किसानों का कहना है कि प्रधान पद के भावी उम्मीदवार और उनके समर्थक कुछ स्वार्थी तत्वों के साथ मिलकर चकबंदी को रुकवाने की कोशिश कर रहे हैं।
संतुष्ट किसान: इस पक्ष का यह भी कहना है कि 20 साल से चल रही इस प्रक्रिया में लगभग 90 प्रतिशत किसान संतुष्ट हैं और केवल कुछ लोग ही इसे बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।
मौके पर मौजूद किसान-
धरने में शामिल किसानों में बिल्लू राणा, बबली शर्मा, विजयपाल, नेत्रपाल, रामपाल आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।
यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही मोर्चों पर चर्चा का विषय बन गया है, और प्रशासन के लिए इसका जल्द से जल्द समाधान करना एक चुनौती है।










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