मुजफ्फरनगर। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद बाल श्रम की कड़वी सच्चाई एक बार फिर उजागर हुई है।
ताज़ा मामला शामली रोड स्थित एक ढाबे से सामने आया है, जहाँ 8 वर्षीय विशाल और 10 वर्षीय शिवम — दो सगे भाई मजदूरी करते पाए गए।
इन मासूमों के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। दो बहनें शादीशुदा हैं और इन बच्चों के पास न रहने का ठिकाना है, न ही भोजन का साधन। जीवन की कड़वी सच्चाइयों के आगे झुककर, ये मासूम पिछले दो महीने से ढाबे पर काम करने को मजबूर थे। हिंदू युवा वाहिनी ने देर रात मारा छापा सोमवार देर रात हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं को जब इस बाल श्रम की सूचना मिली, तो क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रह्लाद पाहुजा मौके पर टीम सहित पहुंचे और पूरे मामले का खुलासा किया।
मंगलवार सुबह उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि जनपद के सभी ढाबों और होटलों पर विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाए और बाल श्रम के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए। सवाल बरकरार: बाल श्रम पर रोक सिर्फ कागज़ों में या ज़मीन पर भी?
मासूम बचपन को झुलसाती ये तस्वीरें फिर सवाल उठाती हैं—
क्या बाल श्रम जैसे अमानवीय अपराध पर लगाम अब भी सिर्फ कानून की किताबों तक ही सीमित है?
या प्रशासन वास्तविक कार्रवाई करेगा?











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