मुजफ्फरनगर। थाना सिविल लाइंस क्षेत्र में वर्ष 2011 में व्यापारी की पत्नी कविता अग्रवाल की लूटपाट के बाद हत्या के सनसनीखेज मामले में आखिरकार 14 साल बाद इंसाफ हुआ।
जिला न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक रविकांत ने सोमवार को तीनों दोषियों—सौरभ वर्मा, नौशाद और राहुल मित्तल—को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही अन्य धाराओं में भी कठोर सजाएं दी गई हैं।
घटना की पृष्ठभूमि
3 अगस्त 2011 की रात करीब 8:15 बजे व्यापारी प्रहलाद राय अग्रवाल की पत्नी कविता अग्रवाल की हत्या उनके ही घर पर कर दी गई थी। व्यापारी जब दुकान से लौटे तो घर का मुख्य दरवाजा खुला मिला और अंदर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि पत्नी का शव खून से लथपथ फर्श पर पड़ा है। उनके हाथ-पैर कपड़ों से बंधे थे और गर्दन व पेट पर धारदार हथियार से वार किए गए थे। साथ ही घर का सामान बिखरा था और लूट के निशान साफ थे।
आरोपी नौकर ही निकला साजिशकर्ता
जांच में खुलासा हुआ कि व्यापारी की दुकान पर काम करने वाला सौरभ वर्मा ही हत्या की साजिश का मास्टरमाइंड था। उसने अपने दो साथियों—नौशाद और राहुल मित्तल के साथ मिलकर घर में लूटपाट की और विरोध पर कविता अग्रवाल की हत्या कर दी। घटना के बाद तीनों अभियुक्तों को SHO संजय वाजपेयी ने 5 अक्टूबर 2011 की रात रेशू विहार क्षेत्र में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। इनके कब्जे से लूट का सामान और हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद किए गए थे।
अदालत का फैसला
अपर सत्र न्यायाधीश रविकांत ने लंबी सुनवाई के बाद सोमवार को फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों को सख्त सजा दी—
•धारा 302 IPC (हत्या) में उम्रकैद और 10,000 जुर्माना
•धारा 394 IPC (लूट) में 10 वर्ष कठोर कारावास और 3,000 जुर्माना
•धारा 307/34 IPC (हत्या का प्रयास) में 5 वर्ष कारावास और 2,000 जुर्माना
•धारा 25 आर्म्स एक्ट में सौरभ वर्मा को 2 वर्ष कारावास और 1,000 जुर्माना
•धारा 25/4 आर्म्स एक्ट में राहुल मित्तल व नौशाद को 2 वर्ष कारावास और 1,000 जुर्माना प्रत्येक
अभियुक्तों की पहचान
•सौरभ वर्मा, पुत्र राजेंद्र कुमार, निवासी प्रेमपुरी, मुजफ्फरनगर
•नौशाद, पुत्र मीर हसन, निवासी कृष्णापुरी, मुजफ्फरनगर
•राहुल मित्तल, पुत्र धनप्रकाश मित्तल, निवासी गली नंबर-2, दक्षिणी कृष्णापुरी, मुजफ्फरनगर
14 वर्षों की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया यह फैसला उन मामलों में से एक है जो यह सिद्ध करता है कि कानून की पकड़ से कोई नहीं बच सकता। कविता अग्रवाल हत्याकांड ने जिस तरह पूरे शहर को दहला दिया था, आज उस पीड़ित परिवार को कुछ हद तक न्याय मिल पाया है।











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