नई दिल्ली. 2025 में केंद्र सरकार ने पब्लिक सेक्टर कंपनियों के कर्मचारियों से जुड़े रिटायरमेंट नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब अगर किसी कर्मचारी को अनुशासनहीनता या किसी अन्य दुर्व्यवहार के चलते से बर्खास्त या सेवा से हटाया जाता है, तो उसकी रिटायरमेंट सुविधाएं भी जब्त की जा सकती हैं.
हाल ही में अधिसूचित के अनुसार अगर किसी सरकारी कर्मचारी को भविष्य में किसी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) में समाहित (absorb) कर लिया गया है, और फिर उस PSU से उसे दुर्व्यवहार के कारण निकाल दिया जाता है, तो उसकी पूरी पेंशन और रिटायरमेंट बेनेफिट्स भी जब्त की जा सकती हैं — यहां तक कि सरकारी सेवा में काम के समय की भी. हालांकि, इस तरह की बर्खास्तगी या निकासी के फैसले की समीक्षा संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय द्वारा की जा सकती है.
पहले नियमों के अनुसार, PSU से किसी कर्मचारी की निकासी के बाद भी उसकी सरकारी सेवा के दौरान अर्जित रिटायरमेंट सुविधाएं बरकरार रहती थीं. नए नियम इस व्यवस्था को खत्म करते हैं और इसे सख्त बनाते हैं.
ऐसे बर्खास्त या रिट्रेंच किए गए कर्मचारियों पर पेंशन और फैमिली पेंशन का भविष्य में अच्छा आचरण (good conduct) आधारित नियंत्रण भी लागू होगा. उन्हें मिलने वाली किसी भी compassionate allowance (सहानुभूति भत्ते) को भी इन्हीं शर्तों के तहत देखा जाएगा.
ये नियम उन केंद्र सरकार कर्मचारियों पर लागू होते हैं जो 31 दिसंबर 2003 या उससे पहले नियुक्त किए गए थे. यह नियम रेलवे कर्मचारियों, दैनिक वेतनभोगियों, और IAS, IPS, IFS जैसे अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों पर लागू नहीं होता.
सरकार का यह कदम सार्वजनिक क्षेत्र में अनुशासन को कड़ा करने और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में उठाया गया है. यह साफ संदेश देता है कि रिटायरमेंट बेनेफिट्स अब ‘गैर-सशर्त अधिकार’ नहीं रहेंगे, बल्कि उनमें कर्मचारी के आचरण की अहम भूमिका होगी.











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