जोधपुर। पहलगाम हमले के बाद आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भारतीय सेना द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक फैली भारत की हजारों किलोमीटर लंबी सीमा पर स्थित महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों और नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमले किए।
राजस्थान में तीन रातों तक पाकिस्तान की ओर से लगातार एक ही तरह की बड़ी मिसाइल दागी गई। ये वही मिसाइलें थीं, जिन पर पाकिस्तान अक्सर नाज करता है और जिनके नाम गौरी, गजनवी, अब्दाली, नस्र और शाहीन जैसे रखकर उन्हें दुनिया की ताकतवर मिसाइलों में गिनाता है लेकिन भारतीय सेना ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से इन सभी मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
9 मई को दोपहर में पाकिस्तान की ओर से दागी गई कई मिसाइलें सीमावर्ती फलौदी क्षेत्र के गांवों के खेतों में आकर गिरीं। हालांकि प्रशासन और सेना ने पहले ही चेतावनी दी थी कि मिसाइल या ड्रोन के मलबे के पास न जाएं, क्योंकि इनमें लगे वारहेड या विस्फोटक कई बार सक्रिय अवस्था में रह जाते हैं और अचानक फट सकते हैं, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है लेकिन इन चेतावनियों को दरकिनार करते हुए कुछ स्थानीय युवकों ने इन मिसाइलों को एक तरह से खिलौना ही बना डाला।
सेना और प्रशासन के मौके पर पहुंचने से पहले ही कुछ ग्रामीणों ने मिसाइलों को उलट-पलटकर देखा, किसी ने कहा कि अगर इसमें कुछ काम की चीज हो तो निकाल लो तो किसी ने इनके साथ सेल्फी लेना शुरू कर दिया। कुछ युवक तो इन मिसाइलों को सामान्य वस्तु समझकर ट्रैक्टर-ट्रॉली या बोलेरो कैंपर में रखकर दूसरी जगह ले गए।
हालांकि बाद में भारतीय वायुसेना के जवान मौके पर पहुंचे और मिसाइलों के मलबे को जब्त कर लिया लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान की मिसाइलों का भारत के नागरिकों पर कोई डर नहीं है। फलौदी के युवाओं ने अपने व्यवहार से यह दिखा दिया कि उन्हें पाकिस्तान के मिसाइलों से कोई भय नहीं, भले ही उनके नाम शाहीन, गौरी या गजनवी क्यों न हों। हमारी सेना इतनी सक्षम हैं कि पाकिस्तान की दागी मिसाइलें भारत की धरती पर कोई नुकसान नहीं कर सकतीं।











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