बैंकॉक। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को थाईलैंड में बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मुहम्मद यूनुस के साथ एक द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में पीएम मोदी ने एक लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन को दोहराया।
उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं को जाहिर किया। यह बैठक बैंकॉक में चल रहे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान हुई, जो दोनों नेताओं के बीच पहली औपचारिक मुलाकात थी।
पिछले साल अगस्त में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले और धमकियों की खबरें सामने आई थीं। बांग्लादेश में हिंदुओं के शीर्ष संगठन ने दावा किया था कि 5 अगस्त के बाद 48 जिलों में 278 स्थानों पर हिंदुओं पर हमले हुए, जिन्हें उन्होंने “हिंदू धर्म पर हमला” करार दिया था।
इन हमलों में हिंदुओं के व्यवसायों, संपत्तियों और मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया। इस संदर्भ में पीएम मोदी ने यूनुस से आग्रह किया कि इन अत्याचारों की गहन जांच की जाए।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भारत की चिंताओं को उठाया और उम्मीद जताई कि बांग्लादेश सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
मोदी ने यूनुस के हालिया पूर्वोत्तर भारत से संबंधित बयानों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बांग्लादेशी पक्ष को ऐसी बयानबाजी से बचने की सलाह दी जो माहौल को खराब कर सकती है। मिस्री ने कहा कि पीएम ने जोर देकर कहा कि ऐसी कोई भी बयानबाजी जो वातावरण को बिगाड़े, उससे बचना चाहिए।
इसके अलावा सीमा सुरक्षा पर चर्चा करते हुए मोदी ने अवैध सीमा पार करने की रोकथाम और कानून के सख्त प्रवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में पीएम मोदी ने बांग्लादेश को बिम्सटेक की अध्यक्षता संभालने पर बधाई दी। क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने में इसके नेतृत्व की सराहना की। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार दोनों नेताओं ने बिम्सटेक ढांचे के तहत क्षेत्रीय एकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए परामर्श और सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
मोदी ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच आपसी हितों के सभी मुद्दों को रचनात्मक चर्चा के जरिए द्विपक्षीय रूप से हल किया जाना चाहिए, जिससे दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे लाभकारी संबंध मजबूत हों।
शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर बांग्लादेश की ओर से औपचारिक अनुरोध के बारे में पूछे जाने पर विदेश सचिव मिस्री ने स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने शेख हसीना को लेकर औपचारिक अनुरोध किया है, लेकिन अभी इस पर और कुछ कहना उचित नहीं होगा।
हसीना 5 अगस्त, 2024 को छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश से भागकर भारत आ गई थीं, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखा गया है।











Discussion about this post