नई दिल्ली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर ‘विकसित भारत – जी राम जी’ करने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव ने देश में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पंचायती राज की मूल भावना पर हमला-
प्रियंका गांधी ने राजीव गांधी के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि पंचायती राज व्यवस्था इसलिए लाई गई थी ताकि सत्ता का विकेंद्रीकरण हो और विकास का पैसा सीधे गांवों तक पहुंचे। उन्होंने कहा, “सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करती है, लेकिन इस नए विधेयक के जरिए वह पंचायतों के अधिकारों को छीनकर सत्ता का केंद्रीकरण कर रही है। यह सीधे तौर पर गांवों की स्वायत्तता पर हमला है।”
फंडिंग में कटौती और जिम्मेदारी से पलायन-
कांग्रेस सांसद ने नए विधेयक के आर्थिक पहलुओं पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले मनरेगा के बजट का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करती थी। लेकिन नए प्रस्ताव में केंद्र की हिस्सेदारी को घटाया जा रहा है, जिससे राज्यों और पंचायतों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया, “सरकार न तो जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही जनता के अधिकारों को सुरक्षित रखना चाहती है। वह केवल जिम्मेदारी से बचने के रास्ते तलाश रही है।”
विपक्ष का एकजुट विरोध-
प्रियंका गांधी के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद राम गोपाल यादव ने भी मनरेगा का नाम बदलने के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया है। विपक्ष का तर्क है कि महात्मा गांधी का नाम हटाना केवल एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के रोजगार की गारंटी वाली योजना की मूल आत्मा को कमजोर करने की कोशिश है।
मुख्य विवादित बिंदु-
नाम परिवर्तन: ‘मनरेगा’ से बदलकर ‘विकसित भारत – जी राम जी’ करना।
फंडिंग: केंद्र की हिस्सेदारी 90% से कम करने का प्रस्ताव।
नियंत्रण: पंचायतों के बजाय केंद्र का हस्तक्षेप बढ़ाने की आशंका।
विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वे इस विधेयक के खिलाफ सदन से सड़क तक आवाज उठाएंगे।











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