फिरोजाबाद। फिरोजाबाद में शहीद फौजी के गांव में पहुंच किसान नेता राकेश टिकैत ने शहीद फौजी के परिवार से मुलाकात की और उनके दर्द में शामिल हुए। उस परिवार की आंखों में वह आंसू दिखे जो शायद शब्दों में बयां नहीं हो सकते। उन्होंने परिवार को दिलासा देते हुए कहा, “”देश आपकी हिम्मत को नहीं भूलेगा, शहीदों का सम्मान हमारी ज़िम्मेदारी है।
लेकिन राकेश टिकैत का दर्द वहीं रुका नहीं। महोबा में एक किसान की आत्महत्या की खबर ने उनके दिल को झकझोर दिया। किसान जो खेतों में अपनी योग्यता और मेहनत से पसीना बहाते हैं, आखिर क्यों अपनी जान लेने को मजबूर हो रहे हैं? टिकैत ने कहा कि सरकार से मुआवजा नहीं मिल रहा, फसलें बर्बाद हैं, कर्ज की बेड़ियाँ तोड़ने को बेबस किसान आत्महत्या कर रहे हैं। यह शब्द सीधे किसान की टूटी हुई उम्मीदों और उस दर्द की चीख हैं जो सुनाई नहीं देती।
और यह दर्द केवल यूपी तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के किसान भी इसी मुश्किल वक्त से गुजर रहे हैं, जहां बीज, खाद, फसल सब कुछ बेकार हो चुका है, पर राहत के लिए कोई मदद नहीं।
राकेश टिकैत ने मजबूर और तंगहाली में झुके किसानों की आवाज़ को बुलंद कर सरकार से एक बार फिर मांग की है – जल्द से जल्द मुआवजा और राहत दी जाए ताकि खेतों से आवाज़ें न दबें और किसान फिर से ज़िन्दगी की नई कहानी लिख सकें।











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