बागपत। वाजिदपुर के द ग्रैंड पैलेस रिसॉर्ट में रक्षित राणा और दिव्या की सगाई एक यादगार और प्रेरणादायक घटना बन गई। आईआईएम से पढ़े रक्षित ने सगाई में दिए गए 21 लाख रुपये के चेक को विनम्रतापूर्वक लौटाकर दहेज प्रथा को करारा जवाब दिया। उनका कहना था कि दहेज एक सामाजिक अभिशाप है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
शिक्षित परिवारों की पहल-
रक्षित ने बताया कि उनके परिवार के शिक्षित संस्कारों के चलते उन्होंने हमेशा दहेज का विरोध किया है। उन्होंने कहा, “समाज में बदलाव की शुरुआत शिक्षित परिवारों से ही होती है।” उनके चाचा डॉ. रविंद्र राणा ने भी पुष्टि की कि परिवार की यही सोच इस फैसले के पीछे का कारण है।
दुल्हन के पिता ने की सराहना-
दुल्हन दिव्या के पिता ओमवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने यह राशि खुशी से अपने बच्चों को दी थी, लेकिन रक्षित और उनके परिवार ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया। वरिष्ठ शिक्षक चौधरी सुखबीर सिंह ने इस कदम की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे उपहार शादी के दो-तीन साल बाद दिए जाने चाहिए।
समारोह में गणमान्य लोगों की मौजूदगी-
सगाई समारोह में बागपत सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान और छपरौली विधायक डॉ. अजय कुमार समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिन्होंने रक्षित के इस कदम की सराहना की।
एक शिक्षित और प्रेरणादायक जोड़ा-
रक्षित ने आईआईएम से एमबीए किया है और गुरुग्राम की एक मल्टीनेशनल कंपनी में फाइनेंस एक्सपर्ट हैं। वहीं, दिव्या ने आईआईटी से एमएससी की है और दिल्ली की मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत हैं। दोनों उच्च शिक्षित हैं और उनका यह फैसला युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन गया है। रक्षित 10वीं और 12वीं में जिले के टॉपर भी रह चुके हैं, जो उनकी गंभीरता और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।











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