मेरठ। गुर्जर प्रतिहार वंश के महान शासक सम्राट मिहिर भोज के नाम से “गुर्जर” शब्द हटाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस संबंध में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट रूप से मांग की है कि सम्राट मिहिर भोज के साथ-साथ “गुर्जर” शब्द को भी यथावत और सम्मानपूर्वक रखा जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि ऐतिहासिक अभिलेखों और शिलालेखों में मिहिर भोज जी का संबंध गुर्जर प्रतिहार वंश से प्रमाणित है। नागभट्ट प्रथम जैसे पूर्वजों के अभिलेखों में भी “गुर्जर” शब्द का प्रयोग हुआ है। ऐसे में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सम्राट मिहिर भोज को एक विशिष्ट जाति का प्रतिनिधि बनाकर पेश करना ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ने का प्रयास है, जिससे समाज में जातीय तनाव उत्पन्न हो रहा है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सम्राट मिहिर भोज 9वीं शताब्दी के प्रतापी शासक थे, जबकि ‘राजपूत’ शब्द का प्रचलन 11वीं शताब्दी के बाद शुरू हुआ। ऐसे में उन्हें किसी एक समुदाय विशेष से जोड़ने की बजाय उन्हें पूरे क्षत्रिय समाज और विशेषकर गुर्जर समुदाय के गौरवशाली प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए।
प्रबुद्ध वर्ग ने चेतावनी दी है कि यदि मेरठ में बनाए गए “गुर्जर सम्राट मिहिर भोज स्मृति द्वार” के नाम में किसी प्रकार का बदलाव या छेड़छाड़ की गई, तो इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकता है, जो शांति व्यवस्था को प्रभावित करेगा।
मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें की गई हैं:
1.“गुर्जर सम्राट मिहिर भोज” नाम को ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार यथावत रखा जाए।
2.समाज में जातीय तनाव फैलाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
3.ऐतिहासिक मुद्दों पर निर्णय लेते समय शासन संवेदनशीलता और प्रमाणों के आधार पर कार्य करे।
4.“गुर्जर सम्राट मिहिर भोज स्मृति द्वार” को लेकर किसी भी दुर्भावनापूर्ण प्रयास को प्रशासन सख्ती से रोके।
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि पूर्व में मिहिर भोज के नाम से कॉलेज, सड़क, मूर्तियाँ स्थापित की गईं और उन सभी में “गुर्जर” शब्द प्रयुक्त हुआ, लेकिन तब किसी प्रकार का विरोध नहीं हुआ। यह इस बात का प्रमाण है कि पहले सामाजिक सौहार्द था, लेकिन अब कुछ लोग इसे राजनीतिक लाभ के लिए तोड़ना चाहते हैं।
ज्ञापन के अंत में मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने और प्रदेश में शांति-सद्भाव बनाए रखने की अपील की गई है।











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