मुज़फ्फरनगर। सोरम में चल रही सर्वखाप महापंचायत में शनिवार को बहिष्कार का ऐलान करने के बाद भी गठवाला खाप के थांबेदार रविवार सुबह शामिल हो गए। इस अचानक हुए बदलाव से खापों के बीच चल रही तनातनी खत्म होती दिखाई दे रही है। थांबेदारों ने कहा कि यह पंचायत सामाजिक है और इसमें सभी को एकजुट होकर शामिल होना चाहिए।
बहिष्कार से शामिल होने तक का घटनाक्रम-
बहिष्कार का ऐलान (शनिवार, 15 नवंबर): गठवाला खाप के चौधरी बाबा राजेंद्र सिंह मलिक ने शनिवार को बुढ़ाना में बैठक बुलाई थी। इस दौरान उन्होंने सोरम में हो रही महापंचायत को ‘अवैधानिक’ बताते हुए बहिष्कार का फैसला किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पंचायत बुलाने की तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है और इसे निजी स्वार्थों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
बहिष्कार का फैसला पलटा (रविवार, 16 नवंबर): रविवार सुबह गठवाला खाप के थांबेदार रविंद्र सिंह के साथ अन्य सदस्य सोरम पहुंचे और पंचायत में शामिल हो गए। इस कदम को खाप के भीतर मतभेद के रूप में देखा जा रहा है।
थांबेदारों का स्पष्टीकरण: पंचायत में शामिल होने के बाद थांबेदारों ने कहा कि यह पंचायत सामाजिक है और सभी को मिलकर समाज के हित में निर्णय लेने चाहिए। कुछ सदस्यों ने सोशल मीडिया पर भी खाप चौधरी के बहिष्कार के फैसले का विरोध किया था। उनका कहना था कि यह समय जोड़ने का है, तोड़ने का नहीं।
महापंचायत का उद्देश्य और आगे की राह-
सामाजिक मुद्दों पर चर्चा: सोरम में आयोजित यह तीन दिवसीय सर्वखाप महापंचायत सामाजिक कुरीतियों जैसे नशाखोरी, दहेज प्रथा और आपसी विवादों को दूर करने के लिए बुलाई गई है।
एकजुटता का संदेश: गठवाला खाप के थांबेदारों का पंचायत में शामिल होना यह दर्शाता है कि आपसी मतभेदों के बावजूद खापें सामाजिक उद्देश्यों के लिए एकजुट होने का प्रयास कर रही हैं।
टकराव से सुलह: गठवाला खाप और बालियान खाप के बीच पिछले कुछ समय से चल रहे टकराव को भी इस घटनाक्रम के बाद सुलझता हुआ माना जा रहा है।










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