शामली। उत्तर प्रदेश के शामली जिले में पुलिस और एक पूर्व सभासद पर मिलीभगत कर अवैध कब्जा करवाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
हारून नामक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि वह बीते आठ वर्षों से एक दुकान में टायर की दुकान चला रहा था, लेकिन शुक्रवार देर रात एक पूर्व सभासद अपने करीब एक दर्जन साथियों के साथ उसकी दुकान पर पहुंचा और जबरन कब्जा करने की कोशिश की। विरोध करने पर हारून के साथ मारपीट की गई और फिर पुलिस ने उसके खिलाफ ही कार्रवाई कर दी।
पीड़ित हारून का कहना है कि जब वह घटनास्थल पर पहुंचा, तो पूर्व सभासद और उसके साथियों ने उसके साथ मारपीट की। उसने पुलिस को सूचना दी, लेकिन सदर कोतवाली पुलिस ने उल्टे उसे ही हिरासत में ले लिया और पूरी रात लॉकअप में बंद रखा। आरोप है कि पुलिस ने हथौड़े और ग्राइंडर से दुकान के ताले तोड़कर जबरन एक दबंग को कब्जा दिलवा दिया।
शनिवार सुबह जब जनपद में वरिष्ठ अधिकारियों के आगमन की सूचना फैली, तब बिना कोई कार्रवाई दर्ज किए, पुलिस ने चुपचाप हारून को रिहा कर दिया। रिहा होने के बाद पीड़ित हारून ने कोतवाली गेट पर रोते हुए मीडिया के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की और आरोप लगाया कि पुलिस ने डेढ़ लाख रुपये लेकर जबरन कब्जा करवाया है। हारून ने बताया कि बीती रात करीब 11:30 बजे दुकान में सामान भरकर उस पर ताला लगा दिया गया।
यह संपत्ति वक्फ बोर्ड से संबंधित बताई जा रही है, जिस पर पहले से ही केंद्र और राज्य सरकारें सख्त नजर रखे हुए हैं। इसके बावजूद इस मामले में राजस्व विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जब मीडिया ने इस संबंध में कोतवाली पुलिस से संपर्क किया, तो किसी भी अधिकारी ने बयान देने से इनकार कर दिया। अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि क्या शामली में पैसा देकर कानून और इंसाफ को खरीदा जा सकता है?











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