लखनऊ। बाराबंकी के श्रीराम स्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (SRMU) में छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज के बाद आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा है। मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय और विधानसभा के बाहर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र अपनी ही सरकार के खिलाफ गुस्से में नज़र आये। ‘संजय प्रसाद होश में आओ’, ‘पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद’, ‘योगी सरकार मुर्दाबाद’ और ‘छात्र शक्ति जिंदाबाद’ के नारे गूंजते रहे। ABVP बीजेपी का ही छात्र संगठन है लेकिन दो दिन से अपनी ही सरकार के खिलाफ ज़्यादा मुखर नज़र आ रहा है।
श्रीराम स्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (SRMU) में लॉ डिग्री की मान्यता और छात्रों के सस्पेंशन को लेकर ABVP कार्यकर्ता कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे। सोमवार को छात्रों ने संबद्धता और अनियमितताओं पर सवाल उठाए तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें दर्जनभर से ज्यादा छात्र घायल हो गए। कुछ छात्रों को गंभीर चोटें आई।जिनमे कुछ छात्रों को लखनऊ के केजीएमसी में भर्ती कराया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर नाराजगी जताते हुए तुरंत सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। बाराबंकी के सीओ सिटी हर्षित चौहान को निलंबित कर सीओ ऑफिस से सम्बद्ध कर दिया गया है। कोतवाली प्रभारी रामकिशन राणा और चौकी इंचार्ज को लाइनहाजिर किया गया है। मौके पर मौजूद सभी पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन से सम्बद्ध कर दिया गया। साथ ही, अयोध्या मंडलायुक्त को यूनिवर्सिटी की डिग्री की वैधता जांचने और IG अयोध्या को लाठीचार्ज की जांच सौंप दी गई है।
बाराबंकी में हुए इसी लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को ABVP के छात्र लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे थे तो यहां भी पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया और उन्हें उठाकर ले गई। इन छात्रों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की मिलीभगत से पुलिस के बीच गुंडे घुस आए थे। पहले गुंडों ने छात्रों को मारा-पीटा और जब उन्होंने विरोध किया तो पुलिस ने उन पर जानलेवा लाठीचार्ज कर दिया। छात्र-छात्राओं पर निर्ममता से लाठियां बरसाई गईं, यहां तक कि कमर से ऊपर वार किए गए। छात्रों ने इसे सुप्रीम कोर्ट के नियमों का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह सिर्फ लाठीचार्ज नहीं, बल्कि सुनियोजित हमला था।
यूनिवर्सिटी के खिलाफ छात्रों का आक्रोश केवल पुलिसिया कार्रवाई तक सीमित नहीं है। ABVP का कहना है कि लंबे समय से SRMU छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। लॉ विभाग की डिग्री की मान्यता ही संदेह के घेरे में है। 2022 में जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया से संबद्धता की जानकारी मांगी गई तो स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। अब छात्र कह रहे हैं कि बिना मान्यता की डिग्री देकर उनके करियर से खिलवाड़ किया गया है।
बाराबंकी जिला अस्पताल से घायल 9 छात्रों को लखनऊ के केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। सभी को गैस्ट्रो सर्जरी वार्ड में शिफ्ट किया गया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने रात में सभी घायल छात्रों से मुलाकात की और डॉक्टरों को निर्देश दिया कि इलाज में कोई लापरवाही न हो। छात्रों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
एनएसयूआई अध्यक्ष अनस रहमान ने केजीएमयू पहुंचकर ABVP छात्रों से मुलाकात की और कहा—”यह सिर्फ ABVP का मुद्दा नहीं, बल्कि हर छात्र का मुद्दा है। हम सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे और महाआंदोलन करेंगे।” राष्ट्रीय छात्र पंचायत ने भी विधानसभा का घेराव कर यूनिवर्सिटी प्रशासन पर मनमानी फीस और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
बाराबंकी की घटना के बाद विपक्षी छात्र संगठन, स्थानीय विधायक और मंत्री तक सक्रिय हो गए। दबाव बढ़ने पर ही सरकार ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की। लेकिन छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक यूनिवर्सिटी प्रशासन पर ठोस कार्रवाई और डिग्री की मान्यता को लेकर स्पष्ट रिपोर्ट नहीं आती, तब तक आंदोलन और उग्र होगा।
ABVP के कार्यकर्ता प्रत्यूष पांडेय ने बताया—”हम शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, तभी पुलिस-गुंडा गठजोड़ ने हमला कर दिया। पुलिस ने हमें गिराकर बेरहमी से पीटा। अगर इंसाफ नहीं मिला तो हम और बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।”इन्होंने बताया कि फीस से ज्यादा जुर्माना वसूला जा रहा है। छात्र जब कुलपति से वार्ता करने पहुंचते हैं तो बात करने के बजाय पुलिस बुला ली जाती है। उन्होंने कहा कि रामस्वरूप यूनिवर्सिटी भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है जो छात्रों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। यह विरोध प्रदर्शन तब तक नहीं थमेगा जब तक यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कार्रवाई नहीं होगी।
राष्ट्रीय छात्र पंचायत के कार्यकर्ता भी एबीवीपी के समर्थन में विधानसभा का घेराव करने पहुंच गए। गेट नंबर-1 पर उत्तर प्रदेश पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए प्रदर्शन करने लगे। पुलिस ने छात्रों को पकड़ लिया। पंचायत के अध्यक्ष शिवम पांडेय ने बताया- रामस्वरूप यूनिवर्सिटी में छात्रों के ऊपर लाठीचार्ज किया गया। दो दर्जन से ज्यादा छात्र केजीएमयू में भर्ती हैं। उन छात्रों का कसूर इतना था कि वह पढ़ने के लिए रामस्वरूप यूनिवर्सिटी आए थे। लाॅ की डिग्री देने में रामस्वरूप सक्षम नहीं था तो वह छात्रों के ऊपर पुलिस बुलाकर जबरन अपराधियों के तरीके से पिटवाने का काम किया। अब लखनऊ में विरोध प्रदर्शन किया गया तो यहाँ भी पुलिस ने छात्रों को पीटा है। ABVP के छात्रों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद पर ज़्यादा गुस्सा निकाला। उन्होंने आरोप लगाया कि रामस्वरूप यूनिवर्सिटी के मालिकों के प्रमुख सचिव से नजदीकी सम्बन्ध है इसी कारण पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। ABVP ने अपने फेसबुक पर संजय प्रसाद के खिलाफ एक पोस्टर भी पोस्ट करके गंभीर आरोप लगाए है।










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