मुजफ्फरनगर। जिले में गन्ने की फसल को रोगों और कीटों से बचाने के लिए जिला गन्ना अधिकारी संजय मिश्रा ने मंगलवार को विभिन्न क्षेत्रों के खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ गन्ना शोध केंद्र मुजफ्फरनगर के वैज्ञानिक भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर गन्ने की फसल का हाल जाना और रोग व कीट नियंत्रण के प्रभावी उपाय बताए।
निरीक्षण के दौरान डीसीओ ने बताया कि जिन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी उतर चुका है, वहां जड़ गलन (रूट रॉट) रोग से बचाव हेतु थायोफेनेट मिथाइल 70 WP या कार्बेन्डाजिम 50 WP को 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर जड़ों के पास डालें। वहीं, फसल की वृद्धि के लिए गुलाबखस उर्वरक 19:19:19 को 5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई।
कई क्षेत्रों में सफेद मच्छी के प्रकोप की भी पुष्टि हुई। इसके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL का 150–200 मिली प्रति हेक्टेयर (625 लीटर पानी में) घोल बनाकर छिड़काव करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने कहा कि जुलाई से सितंबर का समय गन्ने की वृद्धि का पीक पीरियड है, ऐसे में फसल की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। किसी भी प्रकार के रोग या कीट प्रकोप की सूचना तुरंत जिला गन्ना कार्यालय या विभाग के टोल-फ्री नंबर 18001213203 पर दें। निरीक्षण के दौरान डॉ. ओ.एस. जोशी, डॉ. एस.पी. सिंह व गन्ना विकास निरीक्षक मुलायम यादव भी मौजूद रहे।










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