नई दिल्ली। विश्व प्रसिद्ध मथुरा के श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और दर्शन के समय को लेकर चल रहा विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुँच गया है। सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने मंदिर प्रबंधन कमेटी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) और कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई अब जनवरी 2026 के पहले हफ्ते में होगी।
क्या है मुख्य विवाद?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए भगवान के दर्शन का समय प्रतिदिन ढाई घंटे बढ़ा दिया है। मंदिर के सेवायत और प्रबंधन कमेटी इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। याचिका में दर्शन का समय बढ़ाने, ‘देहरी पूजा’ को रोकने और कमेटी में सदस्यों की नियुक्ति के तरीके को चुनौती दी गई है।
“भगवान के आराम में दखल नहीं” — सेवायतों का तर्क-
सुनवाई के दौरान प्रबंधन कमेटी की ओर से दलील दी गई कि बांके बिहारी जी के दर्शन और सेवा का समय सदियों पुराने पूजा विधान पर आधारित है। भगवान के विश्राम का एक निश्चित समय होता है, जिसमें बदलाव करना शास्त्रों और परंपराओं के विरुद्ध है। सेवायतों का कहना है कि दर्शन का समय बढ़ने से पूजा पद्धति और भगवान के विश्राम में बाधा आती है।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: VIP कल्चर पर प्रहार-
जब याचिकाकर्ताओं ने ‘भगवान के आराम’ का हवाला दिया, तो उच्चतम न्यायालय ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने सवाल उठाया, “भगवान के आराम के वक्त में उन्हें आराम कहाँ करने दिया जाता है? जब आम श्रद्धालु दर्शन नहीं कर सकते, तब प्रभावशाली (VIP) लोग बड़ी रकम देकर पूजा कर पाते हैं। उन्हें उस वक्त इजाजत कैसे मिल जाती है?” अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा कि अगर आम जनता के लिए दर्शन का समय बढ़ाया गया है, तो इस पर किसी को क्या आपत्ति होनी चाहिए?
जनवरी में होगा अगला फैसला-
अदालत ने फिलहाल सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। जनवरी 2026 में होने वाली अगली सुनवाई में यह तय हो सकता है कि मंदिर में दर्शन की व्यवस्था पुरानी परंपरा के अनुसार रहेगी या कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी के नए नियमों के तहत जारी रहेगी। इस सुनवाई पर देश भर के करोड़ों कृष्ण भक्तों की निगाहें टिकी हुई हैं।











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