लखनऊ। आपराधिक मामलों का सामना कर रहे सांसदों और विधायकों की सदस्यता पर सवाल उठाने वाला लोकसभा के पिछले सत्र में पेश किया गया विधेयक अब विवादों में घिरता जा रहा है। इस विधेयक में स्पष्ट प्रावधान है कि अगर किसी सांसद, मुख्यमंत्री, मंत्री या यहाँ तक कि प्रधानमंत्री को भी 30 दिनों से ज़्यादा जेल में रहना पड़ा, तो उसका पद स्वतः ही समाप्त हो जाएगा।
इसी प्रावधान पर सवाल उठाते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा है – कि यह बिल जल्दबाजी में लाया गया है, यह संविधान और कानून की मूल भावना के खिलाफ है। उनका कहना है कि यह प्रावधान न केवल असंवैधानिक है, बल्कि बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन भी करता है।
अवधेश प्रसाद ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका और विधायी प्रक्रिया अलग-अलग हैं, ऐसे में जेल में रहने भर से किसी पद को स्वचालित रूप से समाप्त कर देना न्यायसंगत नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसे प्रावधान लागू हुए तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा आघात माना जाएगा।
अब सवाल ये उठता है कि – क्या यह बिल नेताओं पर बढ़ते आपराधिक आरोपों को रोकने के लिए है, या फिर यह जनप्रतिनिधियों की वैधता को ख़तरे में डालने वाला कदम साबित होगा? इसका असली असर संसद में बहस और मत विभाजन के बाद ही साफ होगा।










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