दमोह. मध्यप्रदेश की राजनीति में एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसमें एक पूर्व भाजपा विधायक की निजी ज़िंदगी कोर्ट के दरवाज़े तक पहुंच गई है. दमोह जिले के पथरिया से भाजपा की विधायक रह चुकीं सोना बाई अहिरवाल पर उनके ही पति सेवक राम अहिरवाल ने आरोप लगाया है कि विधायक बनने के बाद पत्नी ने उन्हें छोड़ दिया और अब वह अकेले जीवन जीने को मजबूर हैं. सेवक राम ने कुटुंब न्यायालय में अर्जी लगाकर पत्नी से 25 हजार रुपये मासिक गुजारा भत्ता दिलाने की मांग की है. उनका कहना है कि मेरे पास आय का साधन नहीं है, जबकि मेरी पत्नी जो बिना तलाक के आलीशान जिंदगी बिता रही हैं; पेंशन के रूप में हजारों रुपए कमा रही हैं.
सेवक राम का दावा है कि उन्होंने ही सोना बाई को राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया और उनके लिए भोपाल-दिल्ली तक दौड़-धूप की. इसी प्रयास का नतीजा रहा कि 2003 में भाजपा ने सोना बाई को टिकट दिया और वे जीतकर विधायक बनीं. उस समय राज्य में उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी और सोना बाई को उमा भारती की करीबी बताया गया. लेकिन विधायक बनने के बाद, सेवक राम के अनुसार, सोना बाई का व्यवहार पूरी तरह बदल गया. बड़े नेताओं से जुड़ाव के बाद उन्होंने पति को तवज्जो देना कम कर दिया और आखिरकार 2009 में बिना तलाक लिए ही उन्हें छोड़ दिया. वर्तमान में सोना बाई सागर में एक आलीशान मकान में रह रही हैं जबकि सेवक राम दमोह में जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
सेवक राम ने कहा कि वे दिव्यांग हैं और अब मेहनत करने की स्थिति में नहीं हैं. ऐसे में जीवन बसर के लिए उन्हें अपनी नेता पत्नी से ही उम्मीद है. उन्होंने बताया कि सोना बाई के पास संपत्ति, गाड़ियां और विधायक पेंशन की सुविधा है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी पलटकर नहीं देखा. सेवक राम के वकील नितिन मिश्रा ने बताया कि कोर्ट ने उनकी अर्जी स्वीकार कर ली है और पूर्व विधायक को नोटिस जारी किया जाएगा. कोर्ट में पेश होकर सोना बाई को अपना पक्ष रखना होगा, जिसके बाद अदालत तय करेगी कि गुजारा भत्ता कितना और किस आधार पर मिलेगा. फिलहाल सोना बाई इस पूरे मामले पर चुप हैं और मीडिया के सवालों से दूरी बनाए हुए हैं. लेकिन यह मामला अब केवल पारिवारिक नहीं रहा, बल्कि एक महिला नेत्री की निजी ज़िंदगी और उसके राजनीतिक सफर का अहम मोड़ बन गया है, जिस पर सबकी नजरें हैं.











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