भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों के संघर्ष के बाद 10 मई की शाम पांच बजे संघर्ष विराम लागू हो गया। वहीं, इस संघर्ष विराम पर कई पूर्व सेना प्रमुखों और रक्षा विशेषज्ञों ने अपनी अलग-अलग राय दी है।
भारतीय सेना के पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज एम नरवणे ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा- भूमि, समुद्र और वायु पर सैन्य अभियानों का बंद होना एक बहुत ही स्वागत योग्य घटनाक्रम है। हालांकि हमें स्थायी दीर्घकालिक समाधान तक पहुंचने के लिए अन्य मोर्चों पर दबाव बनाए रखना चाहिए। हम घटना आधारित प्रतिक्रिया नहीं कर सकते और आतंकी हमलों में जान नहीं गंवा सकते। यह तीसरा हमला है, भविष्य में कोई और मौका नहीं है।
वहीं भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख वेद मलिक ने भी अपने एक्स हैंडल पर किए गए एक पोस्ट में लिखा- युद्ध विराम 10 मई 25: हमने भारत के भविष्य के इतिहास को यह पूछने के लिए छोड़ दिया है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में पाकिस्तानी भीषण आतंकी हमले के बाद उसकी गतिज और गैर-गतिज कार्रवाइयों से क्या राजनीतिक-रणनीतिक लाभ, यदि कोई हो, प्राप्त हुआ।











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