मुज़फ़्फ़रनगर : मुजफ्फरनगर में शुक्रवार को सरकार के इंसानी अस्पताल में बेजुबानों पर जमकर कहर टूटा। एंबुलेंस में बंद करके पालतू समेत आवारा कुत्तों को थर्ड डिग्री की तरह टॉर्चर किया गया। फॉर्मासिस्ट के इशारे पर एंबुलेंस के तीन चालकों ने सरिए से कुत्तों पर जमकर कहर बरपाया।
आलम ये रहा कि बेजुबान खूब चिल्लाए, लेकिन उनको तरस नहीं आया। इस इंसानी हमले में कई कुत्ते बुरी तरह से जख्मी हो गए। किसी की आंख पर चोट लगी तो किसी के पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में। जिसके बाद अस्पताल परिसर में रहने वाले कुछ लोगों ने इसका घोर विरोध किया और जमकर हंगामा किया।
सरकारी अस्पताल के सरकारी एंबुलेंस के सरकारी चालकों मोनू, अशोक और सुभाष ने पालतू और स्ट्रीट डॉग्स को पकड़कर उन्हें पहले एंबुलेंस में भरा और फिर उन्हें बुरी तरह से सरियों से पीटा। इन कुत्तों को एंबुलेंस में बंद कर उन्हें थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया, जहां कई कुत्ते गंभीर रूप से घायल हो गए।
ये पूरी घटना अस्पताल के फार्मासिस्ट डॉ. अनिल कुमार के इशारे पर की गई बताई जा रही है। उनके आदेश पर ही एंबुलेंस के चालकों ने कुत्तों पर ये क्रूरता की। इस अमानवीय घटना को लेकर अस्पताल परिसर में रहने वाले स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और जमकर हंगामा किया।
कुत्तों पर इस प्रकार के अत्याचार ने आसपास के लोगों को गहरे आघात पहुंचाए। घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ और वहां मौजूद लोगों ने इस कृत्य के खिलाफ जमकर आवाज उठाई। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।
घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने अस्पताल के तीन कर्मचारियों दो एंबुलेंस चालकों मोनू, अशोक और फार्मासिस्ट डॉ. अनिल कुमार के खिलाफ शहर कोतवाली में तहरीर दी है। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की योजना बना रही है।
स्थानीय निवासी आकांक्षा का कहना है कि जिन सरकारी एंबुलेंस का इस्तेमाल बीमार इंसानों के लिए होता है, आज उनका इस्तेमाल कुत्तों को पीटने और फिर उन्हें पुरकाजी तक छोड़ने के लिए किया गया। जिन कुत्तों को मारा गया है, उनमें कई स्ट्रीट डॉग हैं तो कई पालतू भी है। आकाश ने मांग की है कि जो कुत्ते पुरकाजी में छोड़े गए हैं, उन्हें उनके स्थान पर वापस लाया जाए और जो घायल हुए हैं उनका उपचार कराया जाए। साथ ही इस मामले में जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।











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