नई दिल्ली : मंगलवार को हुई बारिश के बाद दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल गर्मी से राहत है लेकिन पिछले कुछ दिनों से उत्तर भारत बुरी तरह से तप रहा था. गर्म हवाएं उत्तर भारत को झुलसा रही हैं और अगले कुछ दिनों तक इसका एक बड़ा हिस्सा हीट वेव की चपेट में रहेगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां गर्मी इतनी भीषण होती है कि तापमान 70 डिग्री सेल्सियस के भी ऊपर पहुंच जाता है? आइए जानते हैं दुनिया के 10 सबसे गर्म स्थानों के बारे में और लेते हैं और लेते हैं वहां अब तक दर्ज किए गए अधिकतम तापमान की जानकारी…
ईरान का बंदर-ए-महशाहर दुनिया के सबसे गर्म स्थानों में से एक है. जुलाई 2015 में यहां का अधिकतम तापमान 74 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो एक असाधारण रिकॉर्ड है. इससे पहले इस क्षेत्र में अधिकतम तापमान 51 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. यह जगह अपनी अत्यधिक ह्यूमिडिटी और उच्च तापमान के लिए जानी जाती है, जो इसे और भी असहनीय बना देता है.
ईरान का बंदर-ए-महशाहर दुनिया के सबसे गर्म स्थानों में से एक है. जुलाई 2015 में यहां का अधिकतम तापमान 74 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो एक असाधारण रिकॉर्ड है. इससे पहले इस क्षेत्र में अधिकतम तापमान 51 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. यह जगह अपनी अत्यधिक ह्यूमिडिटी और उच्च तापमान के लिए जानी जाती है, जो इसे और भी असहनीय बना देता है.
2003 से 2009 के बीच जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार ईरान का दश्त-ए-लूत रेगिस्तान दूसरा सबसे गर्म स्थान रहा है. जहां अधिकतम तापमान 70.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. यह विशाल रेगिस्तानी इलाका पूरी तरह से वीरान है और यहां कोई इंसान नहीं रहता. इसकी बंजरता और अत्यधिक शुष्कता इसे पृथ्वी पर सबसे गर्म स्थानों में से एक बनाती है.
2003 से 2009 के बीच जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार ईरान का दश्त-ए-लूत रेगिस्तान दूसरा सबसे गर्म स्थान रहा है. जहां अधिकतम तापमान 70.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. यह विशाल रेगिस्तानी इलाका पूरी तरह से वीरान है और यहां कोई इंसान नहीं रहता. इसकी बंजरता और अत्यधिक शुष्कता इसे पृथ्वी पर सबसे गर्म स्थानों में से एक बनाती है.
इजरायल का छोटा किबूटज़ तिरात ज़्वी को एशिया की सबसे गर्म जगह माना जाता है. जून 1942 में यहां का अधिकतम तापमान 54 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. सामान्य दिनों में भी यहां का औसत तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रहता है, जिससे यह साल भर गर्म रहता है. जॉर्डन घाटी में स्थित होने के कारण यहां की भौगोलिक स्थिति भी उच्च तापमान में योगदान करती है.
इजरायल का छोटा किबूटज़ तिरात ज़्वी को एशिया की सबसे गर्म जगह माना जाता है. जून 1942 में यहां का अधिकतम तापमान 54 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. सामान्य दिनों में भी यहां का औसत तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रहता है, जिससे यह साल भर गर्म रहता है. जॉर्डन घाटी में स्थित होने के कारण यहां की भौगोलिक स्थिति भी उच्च तापमान में योगदान करती है.
सूडान का शहर वाडी हाल्फा एक ऐसा स्थान है जहां शायद ही कभी बारिश होती है. यहां सबसे ज़्यादा गर्मी जून के महीने में पड़ती है और शहर का औसत तापमान 41 डिग्री सेल्सियस रहता है. अप्रैल 1967 में यहां अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया था, जब तापमान 53 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. यह शहर अपनी शुष्कता और अत्यधिक धूप के लिए जाना जाता है.
सूडान का शहर वाडी हाल्फा एक ऐसा स्थान है जहां शायद ही कभी बारिश होती है. यहां सबसे ज़्यादा गर्मी जून के महीने में पड़ती है और शहर का औसत तापमान 41 डिग्री सेल्सियस रहता है. अप्रैल 1967 में यहां अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया था, जब तापमान 53 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. यह शहर अपनी शुष्कता और अत्यधिक धूप के लिए जाना जाता है.
सहारा रेगिस्तान के दक्षिणी किनारे पर स्थित माली के शहर टिम्बकटू में भी अत्यधिक गर्मी पड़ती है. जनवरी में भी यहां का औसत तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहता है, जो इसकी गर्म जलवायु को दर्शाता है. यहां अब तक का सबसे ज़्यादा तापमान 49 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. टिम्बकटू कभी एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था. लेकिन अब अपनी भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है.
सहारा रेगिस्तान के दक्षिणी किनारे पर स्थित माली के शहर टिम्बकटू में भी अत्यधिक गर्मी पड़ती है. जनवरी में भी यहां का औसत तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहता है, जो इसकी गर्म जलवायु को दर्शाता है. यहां अब तक का सबसे ज़्यादा तापमान 49 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. टिम्बकटू कभी एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था. लेकिन अब अपनी भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है.
लीबिया के रेगिस्तान के बीच में स्थित घडामेस एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जहां लगभग 7,000 लोग रहते हैं. यहां का औसत तापमान 40 डिग्री सेल्सियस रहता है, जबकि अब तक का सबसे ज़्यादा तापमान 55 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. यहां के निवासी गर्मी से बचने के लिए पारंपरिक वास्तुकला का उपयोग करते हैं, जिसमें मोटी दीवारें और भूमिगत मार्ग शामिल हैं.
लीबिया के रेगिस्तान के बीच में स्थित घडामेस एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जहां लगभग 7,000 लोग रहते हैं. यहां का औसत तापमान 40 डिग्री सेल्सियस रहता है, जबकि अब तक का सबसे ज़्यादा तापमान 55 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. यहां के निवासी गर्मी से बचने के लिए पारंपरिक वास्तुकला का उपयोग करते हैं, जिसमें मोटी दीवारें और भूमिगत मार्ग शामिल हैं.
ट्यूनीशिया का रेगिस्तानी शहर केबिली खजूर के उत्पादन के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां का औसत तापमान भी 40 डिग्री सेल्सियस रहता है और अब तक का सबसे ज़्यादा तापमान 55 डिग्री सेल्सियस मापा गया है. यह शहर सहारा रेगिस्तान के प्रवेश द्वार पर स्थित है, जो इसकी गर्म जलवायु का मुख्य कारण है.
ट्यूनीशिया का रेगिस्तानी शहर केबिली खजूर के उत्पादन के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां का औसत तापमान भी 40 डिग्री सेल्सियस रहता है और अब तक का सबसे ज़्यादा तापमान 55 डिग्री सेल्सियस मापा गया है. यह शहर सहारा रेगिस्तान के प्रवेश द्वार पर स्थित है, जो इसकी गर्म जलवायु का मुख्य कारण है.
अमेरिका की डेथ वैली (कैलिफोर्निया) दुनिया के सबसे गर्म और शुष्क स्थानों में से एक है. साल 1913 की गर्मियों में यहां का तापमान रिकॉर्ड 56.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो पश्चिमी गोलार्ध में अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है. गर्मियों में यहां का औसत तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक रहता है. यह अमेरिका में सबसे शुष्क स्थान माना जाता है.
अमेरिका की डेथ वैली (कैलिफोर्निया) दुनिया के सबसे गर्म और शुष्क स्थानों में से एक है. साल 1913 की गर्मियों में यहां का तापमान रिकॉर्ड 56.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो पश्चिमी गोलार्ध में अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है. गर्मियों में यहां का औसत तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक रहता है. यह अमेरिका में सबसे शुष्क स्थान माना जाता है.
इथियोपिया के डालोल में 1960 से 1966 तक हर दिन औसत तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इस आंकड़े के आधार पर इसे पृथ्वी का सबसे अधिक औसत तापमान वाला क्षेत्र माना जा सकता है. ‘नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन’ नामक पत्रिका में प्रकाशित एक स्टडी से पता चला है कि यहां के गर्म, खारे, अतिअम्लीय तालाबों में जीवन पूरी तरह से असंभव है. इन तालाबों में किसी भी प्रकार के सूक्ष्म जीव भी उपस्थित नहीं थे.
इथियोपिया के डालोल में 1960 से 1966 तक हर दिन औसत तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इस आंकड़े के आधार पर इसे पृथ्वी का सबसे अधिक औसत तापमान वाला क्षेत्र माना जा सकता है. ‘नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन’ नामक पत्रिका में प्रकाशित एक स्टडी से पता चला है कि यहां के गर्म, खारे, अतिअम्लीय तालाबों में जीवन पूरी तरह से असंभव है. इन तालाबों में किसी भी प्रकार के सूक्ष्म जीव भी उपस्थित नहीं थे.
लीबिया में अजीजियाह को लंबे समय तक धरती के सबसे गर्म स्थान का दर्जा हासिल था. क्योंकि 1922 में यहां का तापमान 58 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. हालांकि साल 2012 में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने इस रिकॉर्ड को अमान्य कर दिया, क्योंकि इसमें माप की गलती पाई गई थी. फिर भी अजीजियाह लीबिया के सबसे गर्म शहरों में से एक है. आमतौर पर यहां का अधिकतम तापमान 35 से 40 के बीच रहता है.
लीबिया में अजीजियाह को लंबे समय तक धरती के सबसे गर्म स्थान का दर्जा हासिल था. क्योंकि 1922 में यहां का तापमान 58 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. हालांकि साल 2012 में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने इस रिकॉर्ड को अमान्य कर दिया, क्योंकि इसमें माप की गलती पाई गई थी. फिर भी अजीजियाह लीबिया के सबसे गर्म शहरों में से एक है. आमतौर पर यहां का अधिकतम तापमान 35 से 40 के बीच रहता है.











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