नई दिल्ली। अमेरिका ने ईरान से प्रतिबंधित रसायन और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदने के कारण 24 अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन कंपनियों में 6 भारत की हैं, जबकि बाकी चीन, यूएई, हॉन्गकॉन्ग, तुर्की और रूस की हैं। अमेरिका ने यह कदम ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और कथित आतंकी फंडिंग को रोकने के लिए उठाया है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार देर रात यह घोषणा की। मंत्रालय के अनुसार, इन कंपनियों ने 2024 में ईरानी मूल के 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा के उत्पाद यूएई के रास्ते मंगवाए, जिससे ईरान को बड़ा आर्थिक लाभ मिला। अमेरिका का आरोप है कि ईरान इन पैसों का इस्तेमाल परमाणु हथियार कार्यक्रम और आतंकी संगठनों को समर्थन देने में कर रहा है।
इस कार्रवाई पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा कि अमेरिका स्वतंत्र देशों की प्रगति और विकास को रोकने के लिए अपनी आर्थिक ताकत का दुरुपयोग कर रहा है। दूतावास ने इसे “आधुनिक आर्थिक साम्राज्यवाद” करार दिया और कहा कि इसका विरोध करना एक मजबूत ग्लोबल साउथ के लिए खड़े होने जैसा है।
किन भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया?
- अलकेमिकल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड
– इस पर सबसे बड़ा आरोप है। कंपनी ने जनवरी से दिसंबर 2024 के बीच करीब 700 करोड़ रुपए के ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पाद आयात किए। - ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड
– इसने जुलाई 2024 से जनवरी 2025 के बीच 425 करोड़ रुपए से ज्यादा के ईरानी मेथनॉल समेत उत्पाद खरीदे। - ज्यूपिटर डाई केम प्राइवेट लिमिटेड
– इस कंपनी ने टोल्यून जैसे उत्पादों का 49 मिलियन डॉलर का आयात किया। - रमणिकलाल एस. गोसालिया एंड कंपनी
– करीब 22 मिलियन डॉलर के पेट्रोकेमिकल्स मंगवाए जिनमें टॉल्युइन और मेथेनॉल शामिल थे। - पर्सिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड
– अक्टूबर से दिसंबर 2024 के बीच 14 मिलियन डॉलर का मेथेनॉल मंगवाया गया। - कंचन पॉलिमर्स
– इस कंपनी पर 1.3 मिलियन डॉलर के ईरानी पॉलीइथिलीन उत्पाद आयात करने का आरोप है।सपा सांसद इकरा हसन को शादी का प्रस्ताव देने वाले योगेंद्र राणा पर दूसरा मुकदमा दर्ज
अमेरिकी सरकार ने साफ किया है कि यह कार्रवाई ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति का हिस्सा है। अमेरिका का मानना है कि ईरान तेल और रसायन निर्यात से कमाई कर मध्य-पूर्व में अस्थिरता फैलाने और आतंकी गुटों को फंड देने में लगा है।
हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि प्रतिबंधों का उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि ईरान और उससे व्यापार कर रही कंपनियों को अपने व्यवहार में बदलाव के लिए प्रेरित करना है। प्रतिबंधित कंपनियां अगर चाहें तो अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को आवेदन देकर प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं।
यह कार्रवाई केवल भारत तक सीमित नहीं रही। अमेरिका ने तुर्की, चीन, यूएई और इंडोनेशिया की कंपनियों को भी निशाने पर लिया है। अमेरिका का दावा है कि इन देशों की कंपनियां भी ईरान के तेल और रसायन व्यापार में मदद कर रही थीं, जो उसके अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन है।











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