लखनऊ। योगी सरकार ने अयोध्या को विश्वस्तरीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में अयोध्या में प्रस्तावित विश्वस्तरीय ‘मंदिर संग्रहालय’ के लिए भूमि का दायरा बढ़ा दिया गया है। यह संग्रहालय टाटा सन्स के सहयोग से बनाया जाएगा।
टाटा सन्स के साथ त्रिपक्षीय समझौता-
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि टाटा सन्स ने अपने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) फंड से एक अत्याधुनिक मंदिर संग्रहालय बनाने और संचालित करने की इच्छा जताई है।
इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और टाटा सन्स के बीच 3 सितंबर 2024 को एक त्रिपक्षीय समझौता (MOU) पहले ही हो चुका है।
अब 52 एकड़ से अधिक भूमि पर बनेगा संग्रहालय-
वित्त मंत्री ने बताया कि पहले सरकार ने अयोध्या के मांझा जमथरा गाँव में 25 एकड़ नजूल भूमि 90 साल के लिए टाटा सन्स को आवंटित की थी।
संग्रहालय की भव्यता को देखते हुए, टाटा सन्स ने और अधिक भूमि की माँग की थी।
कैबिनेट ने अब इस भूमि के अतिरिक्त 27.102 एकड़ और भूमि आवंटित करने का फैसला किया है, जिससे कुल भूमि 52.102 एकड़ हो गई है।
यह भूमि आवास एवं शहरी नियोजन विभाग से पर्यटन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी।
राजस्व और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा-
सुरेश खन्ना ने बताया कि इस विश्वस्तरीय संग्रहालय के बनने से अयोध्या को एक नई सांस्कृतिक पहचान मिलेगी।
इसके साथ ही, बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पर्यटन से सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
यह संग्रहालय युवा पीढ़ी, विदेशी पर्यटकों और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र होगा।
उन्हाेंने बताया कि वर्ल्ड-क्लास मंदिर संग्रहालय तैयार होने के बाद अयोध्या को न सिर्फ एक नया सांस्कृतिक पहचान चिन्ह मिलेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा होंगे। साथ ही, पर्यटन से सरकार को राजस्व में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी भी होगी। युवा पीढ़ी, विदेशी सैलानियों और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले आगंतुकों को ध्यान में रखते हुए अयोध्या में सांस्कृतिक आकर्षणों को बढाने की दिशा में यह संग्रहालय महत्वपूर्ण होगा।










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