कानपुर : कानपुर के इंपायर क्लीनिक से हेयर ट्रांसप्लांट कराने वाले एक और इंजीनियर की मौत हो गई है। फर्रुखाबाद निवासी इंजीनियर ने केशवपुरम के इंपायर क्लीनिक से इलाज कराया था। हेयर ट्रांसप्लांट करने वाली डॉ अनुष्का फरार हो गई है। डॉक्टर को लेकर कई बड़े खुलासे हुए हैं।
कानपुर के केशवनगर की इंपायर क्लीनिक से हेयर ट्रांसप्लांट कराने पर पनकी पावर हाउस के सहायक अभियंता की मौत के बाद एक और इंजीनियर की मौत हो गई है। इंजीनियर ने भी इंपायर क्लीनिक से इलाज कराया था। फर्रुखाबाद के इंजीनियर की मौत के बाद डॉक्टर को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।
फिलहाल पुलिस आरोपी डॉक्टर की तलाश में दबिश दे रही है। अभी तक हाथ नहीं आ सकी है। उसके क्लीनिक पर लगा बोर्ड और नेम प्लेट भी गायब हो गई है। इंजीनियर की मां और छोटे भाई ने पुलिस कमिश्नर से न्याय की गुहार लगाई थी, जिस पर उन्होंने रावतपुर पुलिस को मामले की जांच सौंपी है।
आरोपी डॉक्टर अनुष्का तिवारी खुद को हेयर ट्रांसप्लांट की विशेषज्ञ बताती थी। साथ ही कम कीमत में बाल उगाने का दावा भी करती थी, अन्य क्लीनिकों में बाल उगाने की सर्जरी लाखों रुपये में होती है, लेकिन डॉक्टर अनुष्का यह काम सिर्फ 40 से 50 हजार रुपये में करती थी। जान गंवाने वाले इंजीनियर मयंक कटियार और विनीत दुबे के परिजनों ने यह दावा किया है।
सर्जरी में करीब पांच घंटे का समय लगता था। सर्जरी के बाद मरीज को घर भेज दिया जाता था। दरअसल, फतेहगढ़ निवासी प्रमोदनी कटियार ने बताया कि बेटा मयंक कटियार (32) प्राणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (पीएसआईटी) से बीटेक करने के बाद निजी कंपनी में नौकरी कर रहा था। वह अपना व्यवसाय कानपुर में ही सेटअप करने की तैयारी में था।
पिछले साल 18 नवंबर को मयंक हेयर ट्रांसप्लांट कराने के लिए केशवपुरम स्थित इंपायर क्लीनिक की डॉ. अनुष्का तिवारी के पास गया था। उसे सुबह करीब आठ बजे बुलाया था। डॉ. अनुष्का ने उसे दो बजे अपनी क्लीनिक से छोड़ा।
हेयर ट्रांसप्लांट के बाद छोटा बेटा कुशाग्र शाम पांच बजे मयंक को फतेहगढ़ स्थित पैतृक घर लेकर आया। रात करीब 12 बजे उसके सिर में तेज दर्द हुआ। डॉ. अनुष्का से बात की तो उन्होंने इंजेक्शन लगवाने की बात कही।
इंजेक्शन लगवाने के बाद भी उसका दर्द ठीक नहीं हुआ। इस पर उन्होंने पट्टी ढीली करने के लिए कहा। वह सारी रात दर्द से कराहता रहा। अगले दिन डॉ. अनुष्का से दोबारा संपर्क किया तो उन्होंने जल्द ही दर्द से निजात मिलने का आश्वासन दिया।
इस बीच मयंक के चेहरे पर सूजन आ गई और सीने में तेज दर्द उठा। उसे आनन फानन हृदयरोग विशेषज्ञ के पास ले गए, लेकिन डॉक्टर ने दिल से संबंधित किसी भी तरह की कोई दिक्कत न होने की जानकारी दी।
उन्होंने डॉ. अनुष्का से मिलने का सुझाव दिया। परेशानियों के बीच 19 नवंबर को उसकी मौत हो गई। करीब छह महीने से इंजीनियर के परिजन थाने से लेकर उच्चाधिकारियों के यहां चक्कर काटते रहे, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
मंगलवार को मयंक की मां ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। रावतपुर थाना प्रभारी केके मिश्रा ने बताया कि डॉक्टर की तलाश में दबी दी जा रही है, लेकिन वह यहां से लापता है।
केशवपुरम के चार मंजिला कॉम्प्लेक्स के भूतल पर इंपायर क्लीनिक है। यहीं बाहर उनका बोर्ड लगा हुआ था। इस पर डेंटल, हेयर और एस्थेटिक्स लिखा था। पनकी निवासी सहायक अभियंता विनीत दुबे की मौत के बाद से यहां ताला लगा हुआ है। बोर्ड भी हटा दिया गया है। कॉम्प्लेक्स की सुरक्षा में तैनात गार्ड ने बताया कि कुछ दिन से डॉक्टर नहीं आ रही हैं। क्लीनिक पर ताला लटका हुआ है। इसी क्लीनिक पर डॉ. अनुष्का के पति भी बैठते थे। वह दांतों के डॉक्टर बताए जा रहे हैं।











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