मेरठ। जनपद में बीते दस दिनों से भय का कारण बने ड्रोन कैमरे अब रात में नहीं उड़ाए जाएंगे। जांच पड़ताल में पता चला कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग नदियों का डिजिटल सर्वे करा रहा है। इसी कारण रात में नदियों के किनारे बसें ग्रामों के ऊपर ड्रोन कैमरे उड़ाए जा रहे हैं। डीआईजी कलानिधि नैथानी ने स्पष्ट किया कि अब दिन में ही सर्वे के लिए ड्रोन उड़ाए जाएंगे। रात में ड्रोन उड़ाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में डीआईजी रेंज के सभी जिलों की पुलिस को आदेश जारी कर दिया है। साथ ही यह भी कहा कि बिना वजह ड्रोन उड़ाने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा थानावार ड्रोन रखने वालों को सत्यापन भी कराया जाएगा।
जिले में सबसे पहले हस्तिनापुर में रात के समय ड्रोन उड़ते देखे गए। इसके बाद किठौर, सरूरपुर, रोहटा, जानी, परतापुर, दौराला थाना क्षेत्रों में रात में लगातार ड्रोन उड़ते देखे गए। किसी अनहोनी की आशंका से ग्रामीण इन ड्रोन को देखकर भयभीय होने लगे। कई गांवों में रात में ग्रामीण पहरा तक देने लगे। संदिग्ध लोगों को पकड़कर पीटने लगे।
पुलिस को भी इनके बारे में जानकारी नहीं हुई। दहशत का पर्याय बनने के बाद ड्रोन के बारे में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के प्रदेश भू-स्थानिक निदेशालय के निदेशक डीएन पाठक की ओर से पत्र जारी किया गया, जिसमें बताया गया कि प्रदेश की सभी नदियों की डिजिटल एलीवेशल मैपिंग का सर्वे कराया जा रहा है। हिंदन नदी, गंगा का सर्वे ड्रोन से कराया जा रहा है।
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने स्पष्ट किया कि ड्रोन नदियों का सर्वे कर रहे हैं। इसके लिए इन्हें ड्रोन नीति का पालन करना होगा। अब दिन में ही ड्रोन उड़ाकर सर्वे किया जाएगा। रात में ड्रोन उड़ाने पर पाबंदी लगाई गई है, ताकि लोग भयभीत न हों।
डीएम डॉ. वीके सिंह ने बताया कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग के प्रदेश भू-स्थानिक निदेशालय के निदेशक डीएन पाठक की ओर से जारी पत्र सही है। नदियों के सर्वे के लिए ड्रोन उड़ाए जा रहे है। जनता इससे भयभीत ना हो। ड्रोन उड़ाने के लिए प्रदेश की ड्रोन नीति का पालन करना होगा।
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि थानों में ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों के साथ बैठक कर ड्रोन अफवाहों के पीछे संभावित शरारती गतिविधियों पर चर्चा की जा रही है। रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक प्रत्येक थाने पर पुलिस स्टाफ को टोलीवार गश्त के लिए लगाया गया है। वरिष्ठ अधिकारी भी भ्रमणशील रहकर इन टोलियों का निरीक्षण कर रहे हैं।
गांवों में शस्त्रधारकों व ग्राम सुरक्षा समिति के सदस्यों के साथ बैठकों के माध्यम से उन्हें ड्रोन अफवाहों के बारे में अवगत कराया जा रहा है। ड्रोन रखने वाले व्यक्तियों की पहचान व विवरण एकत्र कर ‘ड्रोन रजिस्टर’ तैयार किया जा रहा है। इसमें नाम, पता, मोबाइल नंबर, ड्रोन की संख्या एवं तकनीकी जानकारी दर्ज की जा रही है। ड्रोन देखने की झूठी सूचनाएं शरारती तत्व अफवाह फैलाने के लिए कर रहे हैं। इसके लिए जनप्रतिनिधियों को सतर्क किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर किसी प्रकार की झूठी रील, फोटो या वीडियो शेयर न करने की अपील की गई है।











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