बिजनौर। बिजनौर के नांगल थाना क्षेत्र से जुड़े एक वायरल वीडियो मामले में पुलिस जांच ने बड़ा खुलासा किया है। वीडियो में दिखाई गई AK-47 और हैंड ग्रेनेड असली नहीं, बल्कि प्लास्टिक के खिलौने निकले। पुलिस ने बताया कि वीडियो में दिख रही AK-47 प्लास्टिक की थी, जबकि ग्रेनेड वास्तव में परफ्यूम की बोतल था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर दो दिन पहले तेजी से वायरल हुआ था और देखते ही देखते हजारों लोगों तक पहुंच गया था, जिसके बाद पुलिस अलर्ट मोड में आ गई थी।
चार युवक वीडियो में नजर आए-
इस 34 सेकेंड की वायरल वीडियो में चार युवक दिखाई दे रहे थे, जिनमें से एक युवक हथियारों का प्रदर्शन करता हुआ नजर आया। वीडियो वायरल होते ही पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर सीसीटीवी, सोशल मीडिया और फोन लोकेशन की पड़ताल प्रारंभ की। शुरुआती जांच में यह दावा किया गया कि हथियार पकड़े युवक का नाम मैजुल है, जो बिजनौर के गांव सौफतपुर का निवासी है और पिछले तीन साल से दक्षिण अफ्रीका में नाई का काम कर रहा है। चूंकि यह वीडियो उसकी इंस्टाग्राम आईडी से वायरल हुआ था, इसलिए पुलिस ने तुरंत उसके गांव में पूछताछ की।
मैजुल से पुलिस ने किया संपर्क-
नांगल थाना प्रभारी सत्येंद्र मलिक ने मैजुल से मोबाइल नंबर पर संपर्क कर जानकारी जुटाई। पूछताछ में मैजुल ने पुलिस को बताया कि वीडियो में हथियार पकड़े युवक का नाम आकिब है, जो मेरठ जिले के गांव सठला का रहने वाला है। फिलहाल आकिब सऊदी अरब में रहकर कार चालक का काम कर रहा है। उसने बताया कि वीडियो एक इंस्टाग्राम वीडियो कॉल के दौरान रिकॉर्ड की गई थी, जिसमें आकिब सहित चार दोस्त जुड़े थे और उनमें से ही एक ने आकिब से कुछ दिखाने के लिए कहा था।
वीडियो के दौरान दिखाई गई AK-47 और ग्रेनेड सिर्फ दिखावा थे-
मैजुल ने बताया कि वीडियो कॉल के दौरान आकिब ने मजाक के तौर पर प्लास्टिक की AK-47 और परफ्यूम बोतल के रूप में डिज़ाइन किया गया नकली ग्रेनेड कैमरे पर दिखाया। हालांकि वीडियो वायरल होते ही इसे गंभीर सुरक्षा मुद्दे के रूप में लिया गया और सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी विवाद भी हुआ। पुलिस और साइबर सेल अब यह पता लगा रहे हैं कि वीडियो वायरल करने का उद्देश्य क्या था और क्या यह महज मजाक था या इसके पीछे कोई अन्य मकसद।
पुलिस और साइबर सेल कर रहे गहन जांच-
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अब इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हथियारों की नकली प्रस्तुति के पीछे कोई साजिश या भ्रामक अफवाह फैलाने की कोशिश तो नहीं थी। पुलिस ने यह भी संकेत दिया कि सोशल मीडिया पर इस प्रकार का भ्रामक कंटेंट साझा करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आ सकता है, इसलिए आगे संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई संभव है।











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