नई दिल्ली: इजरायल और ईरान के बीच मार-काट मची है. दोनों एक-दूसरे को खत्म करने की कसम खा चुके हैं. इजरायल ने ईरान के 600 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया है. अब ईरान भी पलटवार करने लगा है. ईरान ने अबकी बार उस जगह पर मिसाइल अटैक किया है, जहां उसके नागरिकों की जान बचती है. जी हां, ईरान ने गुरुवार को इजरायल के सोरोका हॉस्पिटल पर मिसाइल से अटैक किया. ईरान के अटैक से इजरायल में चीख-पुकार मच गई. तबाही का मंजर देख सब कांप उठे. ईरानी हमले में अब तक 25 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है.
दरअसल, ईरान ने गुरुवार को मिसाइल से ‘सोरोका मेडिकल सेंटर’ को निशाना बनाया. यह इजराइल के दक्षिण में स्थित मुख्य अस्पताल है. यानी साउथ इजरायल का सबसे बड़ा मेडिकल सेंटर है. जैसे ही इस सोरोका हॉस्पिटल पर ईरान की मिसाइल गिरीं, हाहाकार मच गया. ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई के महज इस अटैक से 10 लाख लोगों की सांस अटक गई. कारण कि महज यह एक हॉस्पिटल से 10 लाख लोगों का लाइफलाइन है.
सोरोका अस्पताल की वेबसाइट के अनुसार, इस अस्पताल में 1,000 से अधिक बिस्तर हैं. यह इजराइल के दक्षिण के लगभग 10 लाख निवासियों को सेवाएं प्रदान करता है. यानी इजरायल के 10 लाख लोगों का इलाज इस अस्पताल से होता है. अगर ईरानी मिसाइल से सोरोका अस्पताल पूरी तरह तबाह होता तो समझिए इजरायल के 10 लाख लोगों पर मुसीबत आ जाती. फिहला, अस्पताल पर अटैक में 25 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों घायल बताए जा रहे हैं.
सोरोका अस्पताल पर अटैक के वीडियो सामने आए हैं. वीडियो देखने पर साफ पता चल रहा है कि यह कितना बड़ा अटैक था. इमारत को काफी नुकसान पहुंचा है. मिसाइल हमले के कारण क्षतिग्रस्त हुईं खिड़कियों और इलाके से उठते घने काले धुएं दिखाई दिए. ईरान ने तेल अवीव में एक ऊंची अपार्टमेंट इमारत और मध्य इजराइल में अन्य जगहों पर भी हमले किए. इजराइल की ‘मैगन डेविड एडम’ बचाव सेवा के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 40 लोग घायल हुए हैं. बताया जाता है कि ईरान ने फतह-1 से हमला किया है.
ईरान का कहना है कि उसका यह हमला इजरायल के 14 जून के हमले का जवाब था. उस इजरायली हमले में दक्षिणी तेहरान में एक स्कूल नष्ट हुआ था. हालांकि, इजरायल ने भी ईरान के अराक न्यूक्लियर साइट पर हमला किया है. ईरान के विशाल परमाणु कार्यक्रम पर यह हमला संघर्ष के सातवें दिन किया गया. इजराइल ने सात दिन पहले ईरान के सैन्य स्थलों, वरिष्ठ अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाकर अचानक हमले किए जिससे यह संघर्ष शुरू हो गया.











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