मुजफ्फरनगर। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर विशाल धरना-प्रदर्शन किया। ऐतिहासिक किसान आंदोलन की पांचवीं वर्षगांठ के मौके पर, भाकियू जिलाध्यक्ष नवीन राठी के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की आवाज बुलंद की।
किसानों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन एडीएम न्यायिक को सौंपा। जिलाध्यक्ष नवीन राठी ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए।
किसानों द्वारा रखी गई मुख्य मांगें-
एमएसपी गारंटी कानून- सभी फसलों के लिए C2+50% फॉर्मूले के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी वाली खरीद का कानून संसद और विधानसभाओं में तुरंत पारित किया जाए।
गन्ना मूल्य और भुगतान- गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) बढ़ाकर ₹500 प्रति क्विंटल किया जाए और मिलों पर बकाया सभी लंबित भुगतान ब्याज सहित तुरंत जारी किए जाएं।
कर्ज माफी- किसानों और कृषि मजदूरों के लिए व्यापक ऋण माफी योजना घोषित की जाए और उन्हें ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाए।
बिजली बिल वापसी- किसान विरोधी बिजली बिल 2025 को तुरंत वापस लिया जाए, बिजली का निजीकरण रोका जाए और खेती के लिए पूरी तरह मुफ्त बिजली दी जाए। स्मार्ट मीटरों पर भी रोक लगाने की मांग की गई।
मंडी व्यवस्था- किसानों की सुविधा के लिए सभी ब्लॉकों में सरकारी मंडियां स्थापित की जाएं।
श्रम कानून- हाल ही में अधिसूचित 4 श्रम संहिताओं को वापस लिया जाए और सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण समाप्त किया जाए।
मजदूरी और पेंशन- न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह तय किया जाए। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और कृषि मजदूरों को ₹10,000 मासिक वृद्धावस्था पेंशन दी जाए।
मनरेगा- मनरेगा का बजट बढ़ाकर 200 दिन का काम और ₹700 दैनिक मजदूरी सुनिश्चित की जाए।
भाकियू नेताओं ने यह भी कहा कि कपास, डेयरी और अनाज क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को मंजूर न किया जाए और पीडीएस व एफसीआई को संरक्षित रखा जाए।
धरना प्रदर्शन में देव अहलावत, सुमित चौधरी, सोमपाल, रविन्द्र, सोनिया, नीरज पहलवान सहित बड़ी संख्या में किसान और यूनियन के पदाधिकारी मौजूद रहे।










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