सिरमौर. हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में दो भाइयों ने एक ही लड़की से शादी की है, यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. यह शादी पारंपरिक जोड़ीदार प्रथा के तहत हुई है, जो इस क्षेत्र में मान्य है. इस प्रथा में, एक महिला दो भाइयों से शादी करती है, और इसे सामाजिक और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त है.

प्रॉपर्टी के बंटवारे से बचना या कुछ और! एक ही दुल्हन से ब्याहे जाते हैं सभी भाई, हिमाचल में फिर जीवित हो रही ‘जोड़ीदार प्रथा’
दरअसल यहां पर दो भाइयों ने सहमति से एक लड़की से विवाह किया। दोनों परिवार शिक्षित हैं। सुनीता चौहान के एक पति प्रदीप नेगी जल शक्ति विभाग में सेवारत हैं तो दूसरे कपिल नेगी दुबई में होटल कारोबार से जुड़े हैं। प्रदीप नेगी का कहना रहा है कि दोनों भाइयों के साथ दुल्हन ने बिना किसी दबाव से विवाह किया है। तीन दिन के विवाह समारोह में 4000 से अधिक मेहमान शामिल हुए।

शादी के बहाने चर्चा में आई गिरीपार की परंपरा
सिरमौर जिला के पुराना शिलाई गांव में दो सगे भाइयों का एक लड़की से विवाह एक ओर परंपरा व संस्कृति के साथ जोड़ा जा रहा है, तो दूसरी ओर कौतुहल का विषय बनकर देशभर में छाया है। बहुपति प्रथा में हुआ विवाह पूरे रीति रिवाज व विधि विधान से हुआ। जो लोग इस विवाह का हिस्सा बने, उनके लिए इसे लेकर अचरज की बात नहीं थी। नई उनके लिए है, जिन्होंने इस परंपरा के बारे में सुना नहीं। इस शादी के बहाने गिरीपार क्षेत्र के दूर दराज क्षेत्रों की पुरानी परंपरा फिर चर्चा में आई है।

यह शादी हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में हुई है. दो भाइयों ने एक ही लड़की से शादी की है. शादी 12 से 14 जुलाई तक तीन दिनों तक चली, जिसमें ढोल-नगाड़े और वीडियो शूट भी किया गया. एक भाई जल शक्ति विभाग में काम करता है और दूसरा विदेश में नौकरी करता है. दुल्हन भी शिक्षित है और एक संपन्न परिवार से है. इस शादी को पारंपरिक जोड़ीदार प्रथा के तहत किया गया है. यह प्रथा हिमाचल प्रदेश के हट्टी समुदाय में पाई जाती है और इसे “उजला पक्ष” या “जोड़ीदारन” भी कहा जाता है. इस प्रथा के अनुसार, एक ही महिला दो भाइयों से शादी करती है, जिससे पारिवारिक संपत्ति और भूमि का विभाजन नहीं होता है. यह प्रथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है, जब द्रौपदी का विवाह पांच पांडवों से हुआ था.

जोड़ीदार प्रथा क्या है?
इसमें एक महिला की शादी एक ही परिवार के कई भाइयों से होती थी — यानी कि एक पत्नी और कई पति। यह “फ्रेटर्नल पॉलिएंड्री” कहलाता है (fraternal polyandry = भाईयों द्वारा साझा पत्नी)।
सुहागरात का चलन इसमें कैसे होता था?
एक साथ नहीं, बारी-बारी
सुहागरात एक पति के साथ होती थी, और बाकी भाई अपनी बारी का इंतजार करते थे।
अक्सर एक समय सारणी या आपसी सहमति से तय होता था कि कौन सा पति कब पत्नी के साथ रहेगा।
रात को पति अपनी बारी के अनुसार पत्नी के पास जाता था।
संकेत देने का तरीका
एक पति जब पत्नी के साथ होता था तो वो कोई खास निशान या प्रतीक (जैसे जूता, छड़ी, या टोपी) बाहर दरवाजे पर रखता था, ताकि अन्य भाई अंदर न आएं।
बच्चे किसके माने जाते थे?
शादी के बाद महिला के पहले बच्चे के जन्म पर सरकारी दस्तावेजों में पिता का नाम बड़े भाई का लिखा जाता है। अगर महिला दूसरा बच्चा जन्म देती है तो उस बच्चे के पिता के रूप में छोटे भाई का नाम दर्ज कराया जाता है। इस तरह बच्चों को भाइयों के नाम से कानूनी पहचान दी जाती है। संपत्ति के मामले में भी बड़ा भाई ही कानूनी पति माना जाता है। हालांकि पारिवारिक और परंपरागत स्तर पर दोनों भाइयों को बराबर का पति माना जाता है।
इस प्रथा का उद्देश्य क्या था?
भूमि विभाजन से बचाव: अगर हर भाई की अलग पत्नी होती तो ज़मीन छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाती।
आर्थिक मजबूती: एक ही घर में सभी भाई एक ही पत्नी से जुड़कर संयुक्त परिवार की तरह रहते थे।
जनसंख्या नियंत्रण: इस प्रथा से बच्चों की संख्या सीमित रहती थी।
क्या अब भी जोड़ीदार प्रथा प्रचलन में है?
आधुनिक शिक्षा, कानूनी सुधार और सामाजिक बदलाव के चलते यह प्रथा अब लगभग खत्म हो चुकी है।
लेकिन कुछ जगहों पर अब भी इसके अवशेष या कहानियाँ सुनने को मिलती हैं, खासकर बुजुर्गों से।











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