उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से छिटपुट बारिश जारी है, लेकिन अभी भी 27 जिलों में 40 फीसदी से भी कम बारिश हुई है, जिसमें 10 जिलों की स्थिति बारिश के लिहाज से बेहद खराब है। ऐसे में इन जिलों में उत्पादन बचाने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशे जा रहे हैं। श्री अन्न, बाजरा व तोरिया की खेती कराई जाएगी । किसानों को निशुल्क बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रदेश में तीन दिन से बारिश का दौर जारी है। बुंदेलखंड में बारिश का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन 10 जिलों में अभी भी 40 फीसदी से कम बारिश है। देवरिया, आजमगढ़, पीलीभीत, जौनपुर, अंबेडकरनगर, संत कबीर नगर, शामली, मऊ, कुशीनगर, गौतमबुद्ध नगर में अभी भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।
ऐसे में इन जिलों के जिला कृषि अधिकारियों से बुवाई की स्थिति में अलग से रिपोर्ट तैयार करने और खरीफ सीजन में उत्पादन बचाने के लिए वैकल्पिक खेती कराने का निर्देश दिया गया है। यह भी पूछा गया कि संबंधित जिले की मिट्टी के अनुसार कौन- कौन सी वैकल्पिक खेती कराई जा सकती है। इसके लिए बीज की आवश्यकता के बारे में भी रिपोर्ट मांगी गई है।
प्रदेश में फसल बुवाई की स्थिति
- धान 65 फीसदी
- मक्का 62 फीसदी
- ज्वार 67 फीसदी
- बाजरा 32 फीसदी
- अन्य मोटे अनाज 31 फीसदी
- उर्द 49 फीसदी
- मूंग 53 फीसदी
- अरहर 52 फीसदी
- मूंगफली 31 फीसदी
- सोयाबीन 79 फीसदी
- तिल 54 फीसदी
प्रदेश में तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहन करने के लिए किसानों को निशुल्क तिलहन मिनीकिट उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए किसानों को आनलाइन आवेदन करना होगा। राज्य सहायतित निःशुल्क तिलहन बीज मिनीकिट वितरण, प्रदर्शन एवं प्रसार कार्यक्रम के तहत तोरिया (लाही) फसल का दो किलोग्राम मात्रा का बीज मिनीकिट निःशुल्क दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को एक अगस्त से 15 अगस्त तक कृषि विभाग के पोर्टल agridarshan.up.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। एक किसान को केवल एक मिनीकिट ही दिया जाएगा। चयनित किसानों को पीओएस मशीन के माध्यम से राजकीय कृषि बीज भंडारों से बीज मिनीकिट वितरित कराया जाएगा।
उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक डा राजर्षि कुमार गौड़ की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की बैठक हुई। इसमें वैज्ञानिकों ने बताया कि जहां कम बारिश हुई है, वहां अब धान के बजाय बाजरा की संकुल प्रजातियां तथा उर्द/ मूंग/तिल की बुआई कराई जाए। बाजरे की फसल में मूंग / उर्द एवं लोबिया की सहफसली खेती करने से उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। इसके किसानों को भी आर्थिक क्षति से बचाया जा सकेगा। पूर्वांचल में यदि अगस्त माह के पहले सप्ताह में बारिश पर्याप्त हो जाती है तो वहां सुगंधित धान की किस्मों की रोपाई की जा सकती है। दलहनी एवं तिलहनी फसलों में जल निकासी की व्यवस्था जरूरी है।











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