मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थायी हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की दशकों पुरानी मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने आज मोर्चा खोल दिया। मुजफ्फरनगर जिला बार संघ के आह्वान पर वकीलों ने अपने चैंबर बंद रखे और शहर के हृदय स्थल शिव चौक पर एकत्रित होकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया।
आंदोलन की मुख्य बातें-
तहसीलों में पसरा सन्नाटा: आंदोलन का असर केवल जिला मुख्यालय ही नहीं, बल्कि खतौली, जानसठ और बुढ़ाना जैसी तहसीलों में भी देखा गया। वकीलों के कार्य बहिष्कार के कारण कचहरी परिसर और तहसीलों में सन्नाटा पसरा रहा और न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप रहा।
जनसमर्थन के लिए सड़कों पर वकील: बार संघ के महासचिव चंद्रवीर निर्वाल एडवोकेट के नेतृत्व में युवा अधिवक्ताओं की टोलियों ने रुड़की रोड सहित शहर के प्रमुख बाजारों का भ्रमण किया। उन्होंने व्यापारियों से संवाद कर इस लड़ाई को जनहित की लड़ाई बताया, जिस पर व्यापारियों ने भी अपनी सहानुभूति जताते हुए समर्थन का भरोसा दिया।
शिव चौक पर गूँजी मांग: बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने शिव चौक पर नारेबाजी करते हुए सरकार को चेतावनी दी। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पश्चिमी यूपी को उसका संवैधानिक हक (हाई कोर्ट बेंच) नहीं मिल जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
अधिवक्ताओं का मुख्य तर्क-
अधिवक्ताओं ने जोर देकर कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से प्रयागराज (इलाहाबाद) की दूरी लगभग 800-1000 किलोमीटर है। एक गरीब वादकारी के लिए इतनी दूर जाकर न्याय पाना आर्थिक और शारीरिक रूप से असंभव होता जा रहा है। क्षेत्र की विशाल आबादी और मुकदमों के बोझ को देखते हुए स्थानीय बेंच की स्थापना अब समय की मांग है।
निष्कर्ष: मुजफ्फरनगर में हुआ यह शांतिपूर्ण लेकिन सशक्त प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि हाई कोर्ट बेंच की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। वकीलों ने आम जनता से भी इस मुहिम से जुड़ने की अपील की है।










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