शामली। झिंझाना क्षेत्र के गांव पुरमाफी में किसान आजाद (50) का खेत में गोली लगा हुआ शव मिला। शव के निकट तमंचा पड़ा था। पुलिस का कहना है कि किसान ने आत्महत्या की है। उस पर बैंक और समिति का कर्ज था, जिससे परेशान होकर वह शराब भी पीने लगा था। किसान की मौत से परिजनों में गम का माहौल है और गांव में शोक छाया हुआ है।
मंगलवार सुबह छह बजे किसान आजाद रोजाना की तरह घर से खेत पर काम करने गए थे। खेत में उनके साथ दो मजदूर भी गए थे। मजदूर काम में लग गए जबकि वे नलकूप से थोड़ा आगे खेत में चले गए। कुछ देर बाद गोली चलने की आवाज सुनी तो मजदूर दौड़कर मौके पर पहुंचे तो किसान का खून से लथपथ शव पड़ा था। सीने में गोली लगी थी। मजदूरों ने इसकी जानकारी परिजनों को दी। परिजन व ग्रामीण मौके पर पहुंचे।
सूचना पर सीओ कैराना श्याम सिंह, झिंझाना पुलिस और फोरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। पुलिस को मौके से तमंचा पड़ा मिला, जिसे कब्जे में ले लिया गया। सीओ श्याम सिंह ने बताया कि परिजनों ने बताया कि किसान पर बैंक और सहकारी समिति का कर्ज था। कर्ज की वजह से वह शराब पीने का आदी हो गया था। कर्ज से परेशान होकर उसने गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
मृतक किसान के भाई धर्मेंद्र ने बताया कि आजाद के पास 15 बीघा जमीन थी, जिसमें कुछ समय पहले उसने दो बीघा जमीन बेच दी थी। मृतक के पुत्र सिद्धार्थ (18) और एक पुत्री दीया है, जो कक्षा नौ में झिंझाना के एक निजी स्कूल में पढ़ती है। सिद्धार्थ पढ़ाई छोड़कर खेती के काम में हाथ बंटाता था। धर्मेंद्र के मुताबिक उसका भाई अपनी बेटी की स्कूल की फीस भी समय पर जमा नहीं कर पा रहा था।
फीस के करीब 40 हजार रुपये हो गए थे। स्कूल की तरफ से फीस जमा करने के लिए बार-बार कहा जा रहा था। उसकी पत्नी भी करीब एक साल से बीमार चल रही है। इसके अलावा बैंक के करीब साढ़े तीन लाख रुपये और सहकारी समिति पुरमाफी के करीब सवा लाख रुपये कर्ज था। धर्मेंद्र ने बताया कि दोनों भाई घर पर इकट्ठे रहते हैं लेकिन खेती अलग-अलग करते हैं।
धर्मेंद्र ने बताया कि उसके भाई आजाद का इस साल का थानाभवन मिल पर गन्ने का करीब दो लाख रुपये भुगतान बकाया है। गन्ने का भुगतान न होने के कारण वह न तो बेटी की फीस जमा कर पाया और न ही पत्नी का इलाज करा पा रहा था। इसी कारण उसके भाई ने आत्महत्या कर ली।











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