नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित होटल ताज महल में आयोजित GCC (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स) समिट 2025 में आज देशभर से उद्योग प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और कॉरपोरेट लीडर्स एकत्रित हुए। यह समिट Invest UP के तत्वावधान में संपन्न हो रही है, जो उत्तर प्रदेश को आईटी और निवेश के वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है। इस अवसर पर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) मुजफ्फरनगर चैप्टर से अमन गुप्ता, जो नेशनल आईटी कमेटी के चेयरमैन हैं, ने विशेष रूप से भाग लिया।
समिट का उद्घाटन IAS विजय कुमार आनंद ने किया, जो मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने Invest UP की ओर से उत्तर प्रदेश में निवेश की अपार संभावनाओं और आईटी सेक्टर में उभरते अवसरों पर विस्तार से चर्चा की। समिट में भारत के GCC इकोसिस्टम की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला गया, जिसमें 1,700 से अधिक GCCs का योगदान, 1.9 मिलियन पेशेवरों को रोजगार और 64.6 बिलियन डॉलर के राजस्व का उल्लेख किया गया। कार्यक्रम में नीति सुधार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट डेवलपमेंट और गवर्नेंस जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
अमन गुप्ता ने अपने संबोधन में आईटी नीति में सुधार की अनिवार्यता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि टियर-2 शहरों में लेवल-1 श्रेणी के लिए वर्तमान न्यूनतम 100 कर्मचारियों की थ्रेशहोल्ड सीमा छोटे और मध्यम आईटी उद्यमों के लिए बाधा सिद्ध हो रही है। इस सीमा को कम किया जाना चाहिए या एक नई लेवल-0 कैटेगरी शुरू की जानी चाहिए। गुप्ता ने तर्क दिया कि यह परिवर्तन प्रदेश के उभरते आईटी स्टार्टअप्स और माइक्रो एंटरप्राइजेज को गति प्रदान करेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।
उनके विचारों को समिट में मौजूद उद्योग प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं ने खूब सराहा। यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश को आईटी सेवाओं के वैश्विक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम में देशभर से उद्योगपति, कॉरपोरेट लीडर्स और सरकारी अधिकारी शामिल हुए। समिट ने GCCs को ऑपरेशनल भूमिकाओं से आगे बढ़ाकर वैश्विक इनोवेशन हब्स बनाने पर फोकस किया, जिसमें पॉलिसी रिफॉर्म्स, इंसेंटिव्स और ईज ऑफ बिजनेस जैसे पहलुओं पर चर्चा हुई। अमन गुप्ता की भागीदारी ने मुजफ्फरनगर जैसे टियर-2 क्षेत्रों की आवाज को राष्ट्रीय मंच पर मजबूत किया।
यह समिट न केवल निवेश आकर्षित करने का माध्यम बनी, बल्कि भारत के GCC सेक्टर को भविष्योन्मुखी बनाने के लिए नीतिगत दिशा भी प्रदान की।










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