बागपत। चीनी मिलों में गन्ने की पेराई पिछले सत्र के बराबर हो चुकी है और चीनी का उत्पादन एक लाख क्विंटल घट गया है। यह चौंकाने वाली बात जरूर है, मगर चीनी मिलों के आंकड़े यही कह रहे हैं।
इसका कारण जलवायु परिवर्तन और गन्ने में चोटी बेधक कीट व लाल सड़न रोग लगने से घटती मिठास है। इससे शुगर मिल प्रबंधन व सरकार चिंतित है। जिससे करीब 40 करोड़ रुपये की चपत अभी तक लगी हैं।
यहां 23 मार्च तक बागपत व रमाला सहकारी चीनी मिल और मलकपुर चीनी मिल ने पिछली साल के बराबर 2.13 करोड़ क्विंटल गन्ना पेराई कर 22.39 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। जबकि पिछली साल 23.44 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन हुआ था। यानी 1.05 लाख क्विंटल चीनी का कम उत्पादन होने से 40 करोड़ रुपये की चपत लगी है।
गन्ना बागपत की न केवल मुख्य फसल बल्कि आर्थिक रीढ़ है। मगर, अबकी बार किसान तथा चीनी मिलों को गन्ने से झटका लगा है। मलकपुर मिल ने अब तक 1.19 करोड़ 49 हजार क्विंटल गन्ना पेराई कर 12.68 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। पिछली साल 1.18 करोड़ 35 हजार क्विंटल गन्ना पेराई कर 13.30 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन था।
सहकारी मिल बागपत ने 34.40 लाख क्विंटल गन्ना पेराई कर 3.58 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। पिछली साल 33.33 लाख क्विंटल गन्ना पेराई कर 3.56 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन था। सहकारी मिल रमाला ने 59.50 लाख क्विंटल गन्ना पेराई कर 6.13 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन किया है। पिछली साल करीब 62 लाख क्विंटल गन्ना पेराई कर 6.58 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन किया था।
किसानों और गन्ना विभाग के अधिकारियों की मानें तो जलवायु परिवर्तन के कारण इस बार कड़ाके की ठंड नहीं पड़ने से गन्ने में मिठास घटने से चीनी उत्पादन गिरा है। अधिकांश क्षेत्रफल पर सीओ-0238 प्रजाति का गन्ना है। इसमें चोटी बेधक कीट व लाल सड़न रोग लगने से गन्ना मिठास तथा चीनी उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है।











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