लखनऊ। उत्तर प्रदेश में MBBS एडमिशन को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रदेश के 10 जिलों के 66 छात्रों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे का लाभ उठाने के लिए फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार करवाए और एमबीबीएस में दाखिला ले लिया। चिकित्सा शिक्षा विभाग की जांच में खुलासा होने पर सभी फर्जी दाखिले रद्द कर दिए गए हैं। साथ ही जिलाधिकारियों को दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इस घोटाले का पहला मामला फिरोजाबाद स्थित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से सामने आया। यहां आगरा निवासी साखी बिस्वास ने यूपी-NEET 2025 में 7,58,778वीं रैंक हासिल की थी। बावजूद इसके उसने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित और एससी वर्ग का लाभ लेकर एमबीबीएस सीट हासिल कर ली। प्राचार्य डॉ. योगेश गोयल को उसका प्रमाण-पत्र संदिग्ध लगा और जांच में यह पूरी तरह फर्जी निकला।
चिकित्सा शिक्षा विभाग की महानिदेशक किंजल सिंह ने बताया कि एमबीबीएस की कुल 4442 सीटों में से 79 सीटें (2%) स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के लिए आरक्षित थीं। पहली काउंसलिंग में 72 छात्रों ने इस कोटे से दाखिला लिया। संदेह होने पर प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कराया गया, तो 10 जिलों के 66 सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। इनमें मेरठ, बलिया, भदोही, गाजीपुर, सहारनपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद, बुलंदशहर और आगरा शामिल हैं।
डीएम आगरा की रिपोर्ट 21 अगस्त को आने के बाद अन्य जिलों से भी सत्यापन शुरू कराया गया। अब तक गाजीपुर, बुलंदशहर, वाराणसी, सहारनपुर और गाजियाबाद से लिखित रिपोर्ट आ चुकी है कि प्रमाण-पत्र गलत तरीके से जारी किए गए थे।
दरअसल, 24 अप्रैल 2015 को शासनादेश जारी किया गया था, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे का लाभ केवल उन्हीं वास्तविक आश्रितों को मिलेगा जिनका प्रमाण-पत्र जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सत्यापित हो। साथ ही 1993 के मूल नियमों का पालन अनिवार्य था। लेकिन इन मामलों में नियमों की अनदेखी कर फर्जी दस्तावेज बनाए गए।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सभी फर्जी दाखिले निरस्त कर दिए हैं। साथ ही जिलाधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि प्रमाण-पत्र जारी करने में हुई गड़बड़ी की जांच कर दोषियों पर एफआईआर दर्ज करें। काउंसलिंग बोर्ड की बैठक के बाद रिक्त हुई सीटें योग्य छात्रों को दी जाएंगी।
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले मेरठ में भी बौद्ध धर्म का फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाकर मेडिकल सीट हासिल करने का मामला सामने आया था। अब स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में हुआ यह बड़ा घोटाला दाखिला प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।










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