नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (सोमवार, 15 दिसंबर) भारत की कूटनीतिक पहुंच को विस्तार देने के उद्देश्य से तीन देशों—जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान—की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो गए हैं। अपनी रवानगी से पहले जारी वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने इन तीनों देशों के साथ भारत के प्राचीन सभ्यतागत और समकालीन द्विपक्षीय साझेदारी संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में इस यात्रा को महत्वपूर्ण बताया।
चरण 1: जॉर्डन— 75 वर्ष के राजनयिक संबंध-
यात्रा की शुरुआत जॉर्डन से होगी, जहाँ प्रधानमंत्री किंग अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर अम्मान पहुँचेंगे। यह यात्रा भारत-जॉर्डन राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर हो रही है।
कार्यक्रम: पीएम मोदी किंग अब्दुल्ला द्वितीय, जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन और क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। वे वहाँ बसे भारतीय समुदाय से भी संवाद करेंगे, जिन्होंने दोनों देशों के संबंधों में अहम भूमिका निभाई है।
चरण 2: इथियोपिया— अफ्रीकी संघ और G20-
जॉर्डन के बाद प्रधानमंत्री इथियोपिया की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर अदीस अबाबा जाएँगे। इस यात्रा का रणनीतिक महत्व है, क्योंकि अदीस अबाबा अफ्रीकी संघ का मुख्यालय है।
G20 कनेक्शन: भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान 2023 में अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाया गया था।
कार्यक्रम: पीएम इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद अली के साथ व्यापक चर्चा करेंगे। इसके अलावा, वे इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे, जहाँ ‘लोकतंत्र की जननी’ के रूप में भारत की यात्रा और ग्लोबल साउथ के लिए साझेदारी के महत्व पर अपने विचार साझा करेंगे।
चरण 3: ओमान— रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करना-
यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ओमान पहुँचेंगे। यह दौरा भारत-ओमान राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है।
कार्यक्रम: मस्कट में प्रधानमंत्री ओमान के सुल्तान से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, व्यापारिक व आर्थिक सहयोग को और सशक्त बनाने पर चर्चा करेंगे। वे ओमान में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे, जिन्होंने ओमान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
यह यात्रा मध्य पूर्व और अफ्रीकी महाद्वीप में भारत के प्रभाव को बढ़ाने और पुराने संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यह तीन देशों की यात्रा भारत के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और सुदृढ़ करेगी।











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