उत्तर प्रदेश। बरेली में हाल ही में हुए उपद्रव के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को बुधवार सुबह पुलिस ने उनके सहारनपुर स्थित आवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया। मसूद बरेली जाकर उपद्रव पीड़ित परिवारों से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने एहतियातन उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी।
बुधवार सुबह से ही सहारनपुर के अंबाला रोड स्थित उनके आवास पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। जैसे ही यह सूचना फैली कि सांसद मसूद बरेली रवाना होने वाले हैं, पुलिस ने उन्हें रोक दिया और घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी।
इस दौरान उनके सैकड़ों समर्थक उनके आवास पर एकत्र हो गए और प्रशासनिक कार्रवाई पर नाराजगी जताई। समर्थकों का कहना था कि एक जनप्रतिनिधि को अपने ही प्रदेश के पीड़ितों से मिलने से रोकना तानाशाही है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
“लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन”-
मीडिया से बातचीत करते हुए इमरान मसूद ने कहा,“मेरा मक़सद सिर्फ बरेली जाकर वहां के पीड़ितों से मिलना और उनका हालचाल पूछना था। लेकिन प्रशासन ने मुझे रोककर न केवल मेरी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीनी, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का भी हनन किया है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक सांसद को भी जनता से मिलने से रोका जा रहा है, तो आम नागरिकों के अधिकारों की क्या स्थिति होगी?
प्रशासन की सफाई-
वहीं, प्रशासन की ओर से इस कदम को “एहतियातन कार्रवाई” बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बरेली की स्थिति संवेदनशील है और किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि से वहां शांति भंग होने का खतरा था। इसी कारण से यह निर्णय लिया गया।
मदनी के बयान से और गरमाई सियासत-
इमरान मसूद की नजरबंदी और इस मुद्दे पर जमीअत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के बयानों ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है और इसे लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने की कोशिश बता रहा है।











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