मुज़फ्फरनगर। गांव मांडी में बर्खास्त प्रधान के बेटे द्वारा गांव का प्रशासन संभालने को लेकर विवाद और तनाव की स्थिति बनी हुई है। दर्जनों ग्रामीण सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और एडीएम (न्यायिक) को प्रार्थना पत्र सौंपा। ग्रामीणों का आरोप है कि 4 अगस्त 2025 को पंचायत समिति का चुनाव हुआ था, जिसमें तीन सदस्य चुने गए थे, लेकिन उसके बावजूद ग्राम पंचायत का सारा कामकाज पूर्व प्रधान के बेटे रियाज अली द्वारा चलाया जा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में इस समय हिंदू-मुस्लिम तनाव का माहौल है, जिससे न सिर्फ सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है बल्कि विकास कार्य भी पूरी तरह ठप हो गए हैं। सड़कें जर्जर हो चुकी हैं, बिजली आपूर्ति बंद है और गांव के स्कूलों की हालत दयनीय हो गई है। स्कूल की दीवारें गिर चुकी हैं जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
ग्रामीण विपिन चौधरी ने बताया कि ग्राम प्रधान को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया गया था। इसके बाद शासन के निर्देश पर पंचायत समिति के गठन के लिए गांव में प्रक्रिया शुरू की गई, जिसमें तीन सदस्य — आसिफ अली, विनय कुमार और इत्तेफाक अली — का चयन किया गया। लेकिन समिति बनने के एक माह बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण मामला अब साम्प्रदायिक तनाव का रूप ले रहा है। विपिन कुमार ने मीडिया को बताया कि छह महीने से गांव विकास कार्यों से वंचित है और ग्राम पंचायत की फाइलें कार्यालयों में घूम रही हैं। उन्होंने योगी सरकार से मांग की है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर समिति को अधिकार सौंपे जाएं ताकि गांव में फिर से विकास कार्य शुरू हो सकें।










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